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New Delhi : महिला आरक्षण बिल पर सियासत गरमाई, मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र की मंशा पर उठाए सवाल

New Delhi: Politics Heats Up Over Women's Reservation Bill; CM Revanth Reddy Questions Centre's Intentions

नई दिल्ली : (New Delhi) महिला आरक्षण बिल (Women’s Reservation Bill) को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज हो गई है। इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (BJP) की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में भाजपा की रणनीति को विपक्ष की एकजुटता ने नाकाम कर दिया।

शनिवार को नई दिल्ली स्थित अपने आधिकारिक आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में रेड्डी ने कहा कि भाजपा ने महिला आरक्षण को “मुखौटा” (facade) बनाकर गलत तरीके से परिसीमन कराने की कोशिश की। उनका आरोप है कि इस कदम के पीछे सरकार की मंशा राजनीतिक लाभ हासिल करने की थी, लेकिन विपक्षी दलों ने मिलकर इसे रोक दिया।

रेड्डी ने कहा कि भाजपा की नीयत 2024 के आम चुनाव के दौरान ही स्पष्ट हो गई थी, जब पार्टी ने “400 पार” का नारा दिया था। उनके अनुसार, यह नारा संविधान में बदलाव करने की मंशा को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा संविधान बदलकर डॉ. भीमराव आंबेडकर (Dr. B.R. Ambedkar) द्वारा दिए गए आरक्षण प्रावधानों को समाप्त करना चाहती है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि भाजपा अब विपक्ष पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस ने हमेशा इस बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कांग्रेस के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी ने महिलाओं को प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे उच्च पदों पर अवसर दिए हैं।

रेड्डी ने राजीव गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं को आरक्षण देने का श्रेय कांग्रेस को जाता है। इसके विपरीत, उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी ने आज तक किसी महिला को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनाया।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को संविधान में संशोधन और आरक्षण समाप्त करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता है। इसलिए पार्टी ऐसे कदम उठा रही है जिससे बड़े राज्यों की सीटों का संतुलन बदलकर बहुमत हासिल किया जा सके। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि परिसीमन गलत तरीके से किया गया, तो केंद्र सरकार (Central Government) भविष्य में संविधान में बदलाव कर सकती है और आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

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