spot_img

New Delhi : पश्चिम एशिया में जारी तनाव से घबराया शेयर बाजार

New Delhi: Stock Market Rattled by Ongoing Tensions in West Asia

नई दिल्ली : (New Delhi) पश्चिम एशिया (ongoing conflict in West Asia) में जारी जंग और कच्चे तेल की कीमत में लगातार तेजी की वजह से घरेलू शेयर बाजार (domestic stock market) एक बार फिर पूरे सप्ताह के कारोबार के बाद गिरावट के साथ बंद हुआ। बीएसई का सेंसेक्स (BSE Sensex) साप्ताहिक आधार पर 1,829.23 अंक यानी 2.33 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,664.21 अंक के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई के निफ्टी ने साप्ताहिक आधार पर 455.60 अंक यानी 1.87 प्रतिशत की गिरावट के साथ पिछले सप्ताह के कारोबार का अंत किया।

हालांकि सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता शुरू होने की उम्मीद की वजह से पहले दो कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में तेजी का रुख बना रहा, लेकिन यह तेजी टिक नहीं सकी। दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता के टल जाने की वजह से बुधवार से लेकर शुक्रवार तक शेयर बाजार लगातार दबाव में कारोबार करता रहा। सप्ताह के इन तीन आखिरी कारोबारी दिन की बात करें तो बुधवार से शुक्रवार के कारोबार में सेंसेक्स में 2,609.12 अंक यानी 3.29 प्रतिशत की गिरावट आ गई। इसी तरह निफ्टी भी आखिरी तीन दिन के कारोबार में 678.65 अंक यानी 2.76 प्रतिशत लुढ़क गया।

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जियो पॉलिटिकल टेंशन (geopolitical tension) और कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी ने घरेलू शेयर बाजार पर लगातार दबाव बनाए रखा। इस बीच आईटी सेक्टर में हुई जोरदार बिकवाली ने घरेलू शेयर बाजार पर दबाव को और भी अधिक बढ़ा दिया। धामी सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत धामी का कहना है कि आईटी सेक्टर में हुई बिकवाली से आईटी इंडेक्स तो प्रभावित हुआ ही, इसके कारण स्टॉक मार्केट के सेंटीमेंट्स पर निगेटिव इफेक्ट भी पड़ा। बाजार पर बने दबाव के कारण निफ्टी ने अपने 20-डे एक्स्पोनेंशियल मूविंग एवरेज 23,900 अंक के अपने सपोर्ट लेवल को भी ब्रेक कर दिया। इस लेवल के नीचे जाने से इस बात का संकेत भी मिलता है कि आने वाले दिनों में स्टॉक मार्केट के सेंटीमेंट्स कमजोर रह सकते हैं।

धामी के अनुसार इस सप्ताह भारतीय शेयर बाजार (Indian stock market) की बड़ी गिरावट में घरेलू और विदेशी दोनों कारक काफी प्रभावी रहे। अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता गतिरोध, क्रूड ऑयल की कीमत में जोरदार तेजी, रुपये में कमजोरी और विदेशी फंडों की लगातार बिकवाली की वजह से इस सप्ताह बाजार पर दबाव बढ़ गया। उन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इकोनॉमिक स्लोडाउन के शुरुआती संकेत दिए हैं। इसके अलावा विदेशी ब्रोकरेज फर्मों ने इंडियन इक्विटी आउटलुक को डाउनग्रेड किया है। इनका भी पिछले सप्ताह के कारोबार पर निगेटिव इफेक्ट पड़ा।

प्रशांत धामी (Prashant Dhami) का कहना है कि अगले सप्ताह 27 अप्रैल के दिन शेयर बाजार की चाल अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में होने वाली प्रस्तावित शांति वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगी। फिलहाल भारी स्टॉक मार्केट में न तो कोई स्ट्रेंग्थ नजर आ रहा है और न ही किसी ट्रिगर की संभावना बन रही है। बाजार की घबराहट को दर्शाने वाला इंडिया वोलैटिलिटी इंडेक्स (इंडिया वीआईएक्स) छह प्रतिशत की उछाल के साथ 19.71 पर पहुंचा हुआ है। ये इस बात का संकेत हैं कि घरेलू शेयर बाजार में डर का माहौल बना हुआ है। ऐसे समय में छोटे निवेशकों को सावधानी बरतते हुए बड़ा निवेश करने से बचना चाहिए। हालांकि अपने निवेश सलाहकार से विचार विमर्श कर निवेशक मजबूत फंडामेंटल्स वाली कंपनियों में लॉन्ग टर्म के लिए निवेश कर सकते हैं लेकिन शॉर्ट टर्म के लिए किया गया निवेश बड़े नुकसान की वजह भी बन सकता है।

Explore our articles