निकाय चुनाव के दूसरे चरण में योगी आदित्यनाथ ने भाजपा प्रत्याशियों के पक्ष में की जनसभा
संतकबीर नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया में योगी ने लगाई दहाड़
गोरखपुर : निकाय चुनाव के दूसरे चरण में बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संतकबीर नगर, आजमगढ़, मऊ और बलिया में जनसभा की। कमल के फूल को खिलाने की अपील करते हुए खुद को माफिया से मुक्ति, शहरों के विकास और युवाओं के सशक्तिकरण पर केंद्रित रखा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डबल इंजन सरकार के कार्यों को गिनाया । उन्होंने विपक्ष की जनविरोधी भावनाओं और कार्यों पर जमकर कुठाराघात किया। योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इसलिए निकाय चुनाव में उतरे हैं कि केंद्र व राज्य सरकारों से निकायों को मिलने वाले पैसे को जनहित में खर्च किया जाय। पहले की सरकारों की तरह उसका बंदरबांट न हो सके।
संत कबीरनगर में बोले, ”मगहर अब नरक का प्रतीक नहीं, स्वर्ग सा प्रतीत हो रहा है
संतकबीर नगर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मध्य काल के महान संत कबीर के आगमन के पूर्व मगहर के बारे में माना जाता था कि यह ऊसर भूमि है। मगहर में मृत्यु का मतलब सीधे नरक की बात होती थी, लेकिन संत कबीर ने उस धारणा को बदला। मगहर में उनकी महापरिनिर्वाण स्थली है। डबल इंजन सरकार ने संत कबीर अकादमी बनाकर उनके मूल्यों, आदर्शों व समाज में समता-समरसता के मूल्यों की स्थापना व शोध को बढ़ावा देने को प्रोत्साहित किया है। जो मगहर मध्यकाल में नरक का प्रतीक माना जाता था, अब डबल इंजन की सरकार में वह स्वर्ग सा प्रतीत हो रहा है।
उन्होंने कहा, संतकबीर नगर से बहने वाली आमी छह साल पहले तक दूषित थी। पालतू पशु उसके जल को पीने से मर जाते थे। अब मगहर में आमी नदी स्वच्छ, निर्मल, अविरल है। उन्होंने कहा कि मुंडेरवा चीनी मिल बंद हो गई थी। पिछली सरकारों ने किसानों पर गोली चलवाई। हमारी सरकार ने न सिर्फ चीनी मिल स्वीकृत की, बल्कि वहां की मिल पेराई भी कर रही है। यहां के किसानों के लिए यह सम्मान का माध्यम बना। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि लोगों मन में यह सवाल है कि नगर निकाय चुनाव में सीएम स्वयं प्रचार करने क्यों आ रहे हैं। हां, मैं आ रहा हूं क्योंकि दिल्ली व लखनऊ से जो पैसे भेजे जाएंगे, उसका सही इस्तेमाल जनता के हित में हो।
आजमगढ़ में गरजे योगी, ”युवाओं को कट्टे से कलम की ओर ले जा रहे हम”
आजमगढ़ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया के अंदर आजगमढ़ को कभी उसके ओज और तेज के लिए जाना जाता था। मगर 2017 पहले जिनके पास सत्ता की बागडोर थी, उन लोगों ने इसका केवल दोहन किया। इतना ही नहीं, कुछ लोगों ने युवाओं के हाथों में कलम के स्थान पर कट्टा दिया। अब समय बदल चुका है और युवाओं के हाथों में कट्टे की जगह कलम ने ले ली है। युवाओं को तमंचे नहीं, टैबलेट दिया जा रहा है। वे तकनीकी से जुड़कर स्किल्ड बन रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले आजमगढ़ के लोगों को दूसरे शहरों में होटल और धर्मशालाओं में कमरे तक नहीं मिलते थे। अब आजमगढ़ को पूर्वांचल एक्सप्रेस से जोड़ा जा चुका है। एयरपोर्ट बन रहा है और अब कट्टा नहीं कलम के लिए महाराज सुहेलदेव के नाम पर विश्वविद्यालय भी शुरू हो चुका है। शीघ्र ही उसका प्रशासनिक भवन बन जायेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार आजमगढ़ से एक कलाकार सांसद बना। परिणाम यह रहा कि यहां हरिहरपुर संगीत महाविद्यालय बनाया गया। आज आजमगढ़ से हर शहर की बेहतर कनेक्टिविटी है। पांच साल पहले कोई आया हो आज वह आजमगढ़ को पहचान भी नहीं पाएगा।
योगी की ललकार, ”मऊ की कानून व्यवस्था को व्हीलचेयर पर लाने वाले खुद व्हीलचेयर पर है”
मऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि याद कीजिए, जो लोग पर्व और त्योहारों में मऊ की कानून व्यवस्था को व्हीलचेयर पर लाने का काम करते थे, आज वे स्वयं व्हीलचेयर पर हैं। सांस लेने के लिए तरस रहे हैं। यह वही जनपद है जहां रामलीला का आयोजन नहीं हो पाता था। यह वही जनपद है, जहां बारी-बारी से सपा और बसपा, पेशेवर अपराधियों और माफिया को अपने सानिध्य में लेकर के अराजकता की छूट देते थे। लेकिन अब कानून व्यवस्था को व्हीलचेयर पर ले जाने वालों को ही व्हीलचेयर पर पहुंचा दिया गया है।
उन्होंने कहा कि कभी स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रगतिशील सोच ने इस जनपद को दिशा दी थी। स्वर्गीय कल्पनाथ राय के योगदान को मऊ विस्मृत नहीं कर सकता। लेकिन बीच के कालखंड में बुआ और बबुआ की पार्टी ने इस क्रांति की भूमि को कर्फ्यू में बदलने का कार्य किया था। सीएम ने यहां भाजपा का बोर्ड बनाने की अपील भी की।
बलिया में योगी की हंक्कार, ”अब व्यापारी और नागरिक सीना तानकर चलते हैं
बलिया में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज हमारे व्यापारी और नागरिक सीना तानकर चल रहे हैं। अपराधी गले में तख्ती बांधकर जान की भीख मांगता फिर रहा है। जिन शहरों में शोहदों का आतंक था, 2017 के बाद वे शहर सेफ सिटी के रूप में उभरे हैं। बलिया की निर्भीकता को प्रदर्शित करती हुई कहावत ”बलिया में घर त कौन बात का डर” सुनाकर कहा कि यह कहावत बलिया के ओज को व्यक्त करने वाली है। जब-जब देश को जरूरत पड़ी बलिया सबसे पहले खड़ा हुआ। देश को आजादी 1947 में मिली, लेकिन बलिया ने 1942 में ही खुद को आजाद घोषित कर दिया था। आपातकाल के दौरान जब लोकतंत्र के गला घोंटा जा रहा था, तब जय प्रकाश नारायण के नेतृत्व में चंद्रशेखर जैसे इस मिट्टी के लालों ने देश को बचाने में योग दिया।


