Tiruvallur: हिंदी थोपे जाने के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा: स्टालिन

तिरुवल्लुर:(Tiruvallur) तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत केंद्र सरकार पर ‘‘निर्लज्जता’’ से हिंदी ‘‘थोपने’’ का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ उनकी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) इस प्रकार के हर प्रयास का विरोध करना जारी रखेगी।

स्टालिन ने राज्य में अतीत में हिंदी विरोधी आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों के सम्मान में बुधवार को यहां आयोजित ‘भाषा शहीद दिवस’ जनसभा में कहा, ‘‘भारतीय संघ पर शासन कर रही भाजपा सरकार ने प्रशासन से लेकर शिक्षा तक हर क्षेत्र में हिंदी को थोपने की प्रथा बना ली है (और) उन्हें लगता है कि वे हिंदी थोपने के लिए सत्ता में आए हैं।’’

द्रमुक अध्यक्ष स्टालिन ने कहा, ‘‘एक राष्ट्र, एक धर्म, एक चुनाव, एक (प्रवेश) परीक्षा, एक भोजन, एक संस्कृति की तरह, वे एक भाषा के जरिए अन्य राष्ट्रीय वर्गों की संस्कृति नष्ट करने की कोशिश कर रहे हैं।’’

हिंदी थोपे जाने के खिलाफ राज्य विधानसभा के अक्टूबर 2022 के प्रस्ताव का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा, ‘‘हिंदी थोपे जाने के खिलाफ हमारा संघर्ष जारी रहेगा। तमिल की रक्षा के हमारे प्रयास हमेशा जारी रहेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार बेशर्मी से हिंदी थोप रही है।’’

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार हिंदी दिवस मनाती है, लेकिन अन्य राज्यों की भाषाओं के मामले में ऐसा नहीं है। स्टालिन ने कहा, ‘‘हिंदी को अधिक महत्व दिए जाने से न केवल अन्य भाषाओं की उपेक्षा हो रही है, बल्कि यह उन्हें नष्ट करने के बराबर है।’’

स्टालिन ने कहा कि 2017-20 के बीच केंद्र ने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए 643 करोड़ रुपये दिए। उन्होंने कहा कि तमिल के लिए 23 करोड़ रुपये से भी कम राशि आवंटित की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम किसी भी भाषा के दुश्मन नहीं हैं। अपने हित के लिए कोई व्यक्ति कितनी भी भाषाएं सीख सकता है, लेकिन हम कुछ थोपे जाने के किसी भी कदम का विरोध करेंगे।’’

स्टालिन ने कहा कि कई हिंदी-विरोधी आंदोलनों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री सी एन अन्नादुरई तमिल और अंग्रेजी के दो-भाषा फार्मूले को सुनिश्चित करने के लिए एक कानून लाए थे, जिसके कारण राज्य के युवा दुनिया के कई हिस्सों में सफल रहे।

स्टालिन ने दो-भाषा फॉर्मूले के बारे में कहा, ‘‘अन्ना ने ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया कि भाषा के लिए शहीद होने वालों का बलिदान व्यर्थ न जाए।’’

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