
ठाणे : (Thane) ठाणे इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। शहर का तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस (city’s temperature has soared to between 38 and 40 degrees Celsius) के बीच पहुंच चुका है और हालात यह संकेत दे रहे हैं कि ठाणे अब ‘अर्बन हीट आइलैंड’ (Urban Heat Island) के गंभीर प्रभाव से गुजर रहा है। तेजी से बढ़ती कंक्रीटिंग और घटती हरियाली ने शहर की प्राकृतिक ठंडक को लगभग खत्म कर दिया है।
हरियाली से कंक्रीट तक: बदलता ठाणे
पर्यावरणविद डॉ. प्रशांत सिनकर (environmentalist Dr. Prashant Sinkar) के मुताबिक, ठाणे कभी अपनी हरियाली और प्राकृतिक संतुलन के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यह सीमेंट-कंक्रीट के जाल में उलझता जा रहा है। खुली जमीन, जल स्रोत और घने पेड़-पौधे, जो प्राकृतिक कूलिंग का काम करते थे, अब तेजी से खत्म हो रहे हैं।शहरों में जब प्राकृतिक सतह की जगह कंक्रीट और डामर ले लेते हैं, तो वे दिनभर गर्मी को सोखते हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ते हैं। इससे-रात में भी तापमान कम नहीं होता,दिन-रात के तापमान का अंतर घट जाता है,शहर लगातार गर्म बना रहता है,ठाणे में यही प्रक्रिया अब तेज होती जा रही है।
कांच की इमारतें और ट्रैफिक भी जिम्मेदार
विशेषज्ञों का मानना है कि कांच की ऊंची इमारतें ‘ग्रीनहाउस इफेक्ट’ (Greenhouse Effect) पैदा करती हैं,वाहनों की बढ़ती संख्या और एसी का इस्तेमाल अतिरिक्त गर्मी पैदा करता है,इंडस्ट्रियल गतिविधियां भी तापमान बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं,इसके अलावा, बड़े और छायादार पेड़ों की जगह सजावटी पौधों का बढ़ता चलन भी स्थिति को और खराब कर रहा है।
‘इवैपो-ट्रांसपिरेशन’ घटा, बढ़ी गर्मी
पेड़-पौधे वातावरण से पानी छोड़कर तापमान को नियंत्रित करते हैं, जिसे ‘इवैपो-ट्रांसपिरेशन’ (evapotranspiration) कहा जाता है। लेकिन ठाणे में हरियाली घटने से यह प्राकृतिक प्रक्रिया कमजोर हो गई है, जिससे वातावरण में गर्मी जमा हो रही है। बढ़ती गर्मी का असर सीधे लोगों की सेहत पर पड़ रहा है- हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ने का खतरा,सांस और दिल की बीमारियों में इजाफा। बुजुर्ग, बच्चे और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित।
विशेषज्ञों ने हालात सुधारने के लिए कुछ अहम सुझाव दिए हैं ग्रीन कवर बढ़ाना और देसी पेड़ों को बचाना,वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना,‘कूल रूफ’ तकनीक अपनाना,खुली जमीन और जल स्रोतों को संरक्षित करना,शहरी विकास में पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता देना,विकास बनाम पर्यावरण: ठाणे की असली चुनौती।ठाणे इस समय विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की सबसे बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।
अगर समय रहते ठोस और वैज्ञानिक कदम नहीं उठाए गए, तो यह शहर ‘स्मार्ट सिटी’ के साथ-साथ ‘हॉट सिटी’ के रूप में भी पहचान बना सकता है। कंक्रीट की बढ़ती परतें सिर्फ शहर का आकार बढ़ा रही हैं, लेकिन उसकी ठंडक छीन रही हैं। ऐसे में हरियाली ही वह सबसे आसान और प्रभावी उपाय है, जो ठाणे को फिर से संतुलित और रहने योग्य बना सकता है।


