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Mumbai : मराठी अनिवार्यता पर ‘बीच का रास्ता’


Mumbai: A 'Middle Ground' on the Marathi Mandate

टैक्सी-रिक्शा चालकों को मराठी सीखने के लिए मिलेगी मोहलत
आज आरटीओ के साथ होगी निर्णायक चर्चा
मुंबई : (Mumbai)
एमएमआर (MMR (Mumbai Metropolitan Region)) में रिक्शा, टैक्सी और कैब चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर जारी विवाद अब सुलझता नजर आ रहा है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक (Transport Minister Pratap Sarnaik) के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में हिंदी भाषी नेताओं और यूनियन पदाधिकारियों ने मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है, जिस पर सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है।

मराठी की अनिवार्यता पर सहमति
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिवसेना और यूनियन अध्यक्ष शशांक राव (Union President Shashank Rao) सहित कुछ नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी पक्षों ने इस बात को स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में सेवा देने वाले चालकों को स्थानीय भाषा (मराठी) का ज्ञान होना चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी भूमिका बदली नहीं है और यह नियम यात्रियों के साथ बेहतर संवाद के लिए है। यूनियन पदाधिकारियों और संजय निरुपम ने मांग की कि 1 मई से कोई दंडात्मक कार्रवाई या सख्ती न की जाए। परप्रांतीय चालकों को मराठी सीखने के लिए कम से कम 6 माह का समय दिया जाना चाहिए। मंत्री सरनाईक ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि मंगलवार को राज्य के सभी 59 आरटीओ (RTO) अधिकारियों के साथ बैठक कर अंतिम समय-सीमा तय की जाएगी।

लाइसेंस और परमिट के साथ एफिडेविट
परिवहन मंत्री ने खुलासा किया कि लाइसेंस बैच या परमिट देते समय ही चालकों से एफिडेविट (शपथ पत्र) लिया गया है कि उन्हें मराठी भाषा का ज्ञान है। यह कोई नया नियम नहीं बल्कि 2019 के जीआर (GR) का हिस्सा है। सरकार अब केवल यह सुनिश्चित करना चाहती है कि चालक स्थानीय भाषा को लिखने, बोलने और समझने में सक्षम हों।

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