लोगों ने हनुमान जी के दर्शन के बाद की मेले में खरीदारी
लखनऊ : जेठ माह के बड़े मंगल पर लखनपुरी में अलीगंज स्थित नए हनुमान मंदिर का परम्परागत मेला लगा। मेले में घरेलू उपयोग की वस्तुएं बिक रही हैं। वहीं दूसरी ओर खेल-तमाशे व झूला लगाने वाले भी आए।
लखनपुरी में साल में चार-पांच परम्पराग मेले लगते हैं। डालीगंज गोमती नदी तट के लोहे वाले पुल पर लगने वाला कतकी का मेला, टिकैतराय तालाब पर लगने वाला आठो का मेला, नाग पंचमी पर हुसैनगंज में लगने वाला सावन का मेला, होली में चौक में लगने वाला एक दिन का मेला और इसके अलावा जेठ के मंगल पर लगने वाला मेला है।
अलीगंज के नए हनुमान मंदिर का यह मेला कपूरथला चौराहे तक लगा है। मेले में बंदूक से गुब्बारे फोड़ने वाला स्टाल लगा है। 20 रुपये में पांच बार गुब्बारे फोड़ सकते हैं। बच्चे उत्साह के साथ इसका आनंद उठा रहे हैं। छोटे वाले झूले लगाए गए हैं जिसमें बच्चे झूल कर खुशी का आनंद ले रहे हैं।
मेले में आगरा से आई दुकानदार ममता अपने खिलौने बेचने आई है। ममता बताती हैं कि वह पिछले 10-12 सालों से यहां बराबर आ रही हैं। मेला बहुत अच्छा लगता है और काफी दूर तक लगता है। यहां सामान की बिक्री अच्छी हो जाती है। वह बताती हैं कि हम लोग शहर-शहर में लगने वाले मेलों में जाते रहते हैं।
मेले में टूंडला से प्लास्टिक के गमले लेकर आए सुनील बताते हैं कि वह भी पिछले कई वर्षों से यहां आ रहे है। वह बताते हैं कि मेले में खास परिवर्तन नहीं हुआ है। यहां अच्छी आमदनी हो जाती है।
वहीं बच्चों के झूले लगाने वाले राहुल भी यहां कई सालों से आ रहे हैं। बताते हैं कि बडे मंगल पर हर साल झूला लगाते हैं। चौराहे के पास ही चाट की दुकानें भी सज रही थीं। इसके अलावा खेल-तमाशे वाले भी आए हैं। मंदिर में दर्शन करने आए भक्तों ने पहले हनुमान जी महाराज के दर्शन किए और उसके बाद मेले का आनंद उठाया।
ऐतिहासिक महत्व
लखनऊ के इतिहासंविद् रहे डॉ. योगेेश प्रवीन ने अपनी किताब ‘लखनऊ नामा’ में लिखा है कि जेठ माह में बड़े मगल पर लगने वाले मेले की परम्परा अलीगंज के नए हनुमान मंदिर की प्रधान परम्परा रही है। कहा जाता है कि यह मंदिर नवाबी काल से स्थापित है और मेला भी तभी से लग रहा है।


