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Lucknow : योगी कैबिनेट में बनारस का बढ़ा दबदबा

Lucknow: Banaras's Influence Grows in the Yogi Cabinet

लखनऊ : (Lucknow) उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल में हंसराज विश्वकर्मा (entry of Hansraj Vishwakarma into the cabinet of Uttar Pradesh’s Yogi Adityanath government) की एंट्री के साथ ही बनारस का राजनीतिक दबदबा और बढ़ गया है। हंसराज विश्वकर्मा ने रविवार को मंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही योगी सरकार में अब वाराणसी क्षेत्र से चार मंत्री हो गए हैं, जो अपने आप में नया राजनीतिक रिकॉर्ड माना जा रहा है।इससे पहले योगी सरकार के पहले कार्यकाल में लखनऊ शहर से तीन मंत्री मंत्रिपरिषद में शामिल थे, लेकिन अब बनारस ने यह रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।

बनारस से अब चार मंत्री

योगी सरकार में वाराणसी से जुड़े नेताओं में दयाशंकर,अनिल राजभर,रविंद्र जायसवाल (Dayashankar, Anil Rajbhar, Ravindra Jaiswal) और नए मंत्री हंसराज विश्वकर्मा शामिल हैं।पहले कार्यकाल में नीलकंठ तिवारी भी मंत्रिमंडल में थे, लेकिन दूसरे कार्यकाल में उनकी जगह दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ को मौका दिया गया। अब हंसराज विश्वकर्मा की एंट्री के बाद बनारस की राजनीतिक ताकत और मजबूत मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने के बाद से ही यूपी की राजनीति में बनारस का प्रभाव लगातार बढ़ा है। विश्लेषक विजय नारायण के मुताबिक, 2024 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की जीत (PM Modi’s victory margin in the 2024 Lok Sabha elections) का अंतर अपेक्षाकृत कम रहा था। इसके अलावा काशी क्षेत्र की कई सीटों पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में पार्टी अब पूर्वांचल और ओबीसी वोट बैंक को लेकर ज्यादा सतर्क नजर आ रही है।

ओबीसी समीकरण साधने की कोशिश

हंसराज विश्वकर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे सबसे बड़ा कारण ओबीसी राजनीति को माना जा रहा है। बीजेपी को यह संदेश देना है कि पार्टी पिछड़े वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।विश्लेषकों का कहना है कि समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के जवाब में बीजेपी अब ओबीसी समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

गाजीपुर प्रकरण का भी असर

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि गाजीपुर के करंडा में विश्वकर्मा समाज की युवती की मौत के मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा था। ऐसे में विश्वकर्मा समाज को साधने के लिए हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाना एक राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और काशी पत्रकार संघ के अध्यक्ष अरुण मिश्रा (Arun Mishra—a senior journalist and President of the Kashi Journalists’ Association) का कहना है कि पूर्वांचल की राजनीति पूरी तरह जातीय समीकरणों पर आधारित है। पश्चिमी यूपी की तरह यहां सांप्रदायिक ध्रुवीकरण बीजेपी को उतना फायदा नहीं देता।उनके अनुसार, पूर्वांचल में विश्वकर्मा समाज एक बड़ा वोट बैंक है और बीजेपी ने हंसराज विश्वकर्मा को मंत्री बनाकर इस समुदाय को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है।

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल मंत्रिमंडल विस्तार नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी का हिस्सा है। बीजेपी पूर्वांचल में अपनी कमजोर होती पकड़ को मजबूत करना चाहती है और बनारस को सत्ता के केंद्र के रूप में और अधिक स्थापित करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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