spot_img

New Delhi : कांग्रेस ने आआपा के बागी सांसदों के भाजपा में विलय को बताया जनता के साथ धोखा

New Delhi: Congress Terms Merger of AAP Rebel MPs into BJP a Betrayal of the Public

नई दिल्ली : (New Delhi) कांग्रेस ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन (Rajya Sabha Chairman C.P. Radhakrishnan) द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के सात बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दिए जाने को जनता के साथ धोखा बताया है।

कांग्रेस कोषाध्यक्ष अजय माकन (Congress Treasurer Ajay Maken) ने यहां पार्टी मुख्यालय में पत्रकार वार्ता में कहा कि इन सांसदों की श्रेणी अब आम आदमी से बदलकर भाजपा की श्रेणी में कर दी गई है और राज्यसभा ने इसे अधिसूचित कर दिया है। साल 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly elections) में भाजपा को केवल 6.6 प्रतिशत वोट मिले थे और उसके सिर्फ दो विधायक बने थे। इसके बावजूद अब राज्यसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व 85.7 प्रतिशत हो गया है, यानी पंजाब से सात में से छह सांसद भाजपा के हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेता पंजाब की जनता को यह कैसे समझाएंगे। भाजपा पंजाब के लोगों को यह कैसे समझाएगी कि जिस पार्टी को विधानसभा में सिर्फ 6.6 प्रतिशत वोट मिले उसका राज्यसभा में प्रतिनिधित्व 85.7 कैसे हो गया।

उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे संवेदनशील राज्य में भाजपा ने ठीक वही किया है, जो अलगाववादी ताकतें सिद्ध करना चाहती हैं। पंजाब में गैंगवार हो रहे हैं, ड्रोन से ड्रग्स पहुंचाए जा रहे हैं और हालात 80 के दशक जैसे हो गए हैं। इतिहास गवाह है कि जब भी अलगाववादी ताकतें सक्रिय होती हैं तो उससे पहले ड्रग्स का प्रसार और अपराध बढ़ता है।

माकन ने कहा कि आआपा भाजपा की बी टीम है और इसके नेता देशद्रोही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आआपा ने योग्य लोगों को राज्यसभा में भेजने के बजाय धनकुबेरों को धन के आधार पर भेजा। उन्होंने कहा कि साल 2017 में सुशील गुप्ता ने कांग्रेस छोड़कर आआपा जॉइन की और बाद में राज्यसभा सदस्य बने। माकन ने दावा किया कि आआपा के सात सांसदों के एफिडेविट देखने पर पता चला कि उनकी औसत नेटवर्थ 818 करोड़ रुपये से अधिक है।

माकन ने आरोप लगाया कि आआपा और अरविंद केजरीवाल ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित (Prime Minister Dr. Manmohan Singh and former Chief Minister Sheila Dikshit) को बदनाम करने की साजिश रची। जब भाजपा इन नेताओं के खिलाफ कुछ नहीं कर पा रही थी, तो उसने आआपा को एक प्रॉक्सी के रूप में आगे किया। अब आआपा वहीं चुनाव लड़ती है, जहां कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला होता है, ताकि कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया जा सके।

Explore our articles