
मुंबई : (Mumbai) कन्नड़ स्टार यश (Kannada star Yash) इस साल दो बड़ी फिल्मों में नजर आने वाले हैं। इनमें एक है उनके द्वारा लिखित और स्टारर फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स’ (‘Toxic: A Fairytale for Grown-ups’) और दूसरी है नितेश तिवारी की ‘रामायण’। हाल ही में यश ने ‘टॉक्सिक’ को लेकर जानकारी दी और फिल्म की कहानी के बारे में बताया। उन्होंने फिल्म में अलग तरह के एक्शन और कहानी के अनोखे नजरिए के बारे में भी बात की।
हर सीन में कुछ अलग होना चाहिए
हाल ही में लास वेगास में सिनेमाकॉन (CinemaCon in Las Vegas) में अपनी फिल्म ‘रामायण’ की झलक दिखाई और ‘रामायण’ के पहले पार्ट को लेकर बात भी की। इसी दौरान यश ने ‘टॉक्सिक’ के बारे में भी कुछ बातें बताईं। एक्टर ने फिल्म के एक्शन और भावनाओं के अलग दृष्टिकोण पर बात करते हुए कहा कि जिस पैमाने और तीव्रता के साथ फिल्म बनी है, हर सीन में कुछ न कुछ अलग होना चाहिए। विविधता होनी चाहिए। एक्शन में एक अलग शैली, एक अलग रूप अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक्शन में गहराई होनी चाहिए। आपको दर्द महसूस होना चाहिए। असल में दिमाग खुल जाना चाहिए। इसीलिए हम सभी को सिनेमा पसंद है।
इंसान की भावनाओं की बात करती है ‘टॉक्सिक’
‘टॉक्सिक’ की कहानी के उद्देश्य के बारे में यश ने कहा कि जब आप कोई फिल्म देखते हैं, तो हम फिल्में क्यों देखते हैं? क्योंकि जीवन में हर कोई हर भावना का अनुभव नहीं कर सकता। इसलिए जब आप कोई फिल्म देखते हैं, तो आप किसी के जीवन से गुजरते हैं और आप समस्याओं या दर्द को समझते हैं। इंसानों की भावनाओं की सबसे गहरी भावनाओं, सबसे गहरी दुविधाओं को इस फिल्म में दिखाया गया है या कम से कम हमने ऐसा करने का प्रयास किया है।
यह बहुत परतदार है। यह सीधे तौर पर नहीं दिखाया गया है। ऐसा नहीं है कि हम इसे जबरदस्ती थोप रहे हैं और कह रहे हैं कि यह डार्कनेस का पक्ष है। नहीं, यह बहुत परतदार है सांकेतिक और भावनात्मक तरीके से। उनका मानना है कि यही खासियत फिल्म को दर्शकों से जोड़ने का तरीका है।


