
17 लाख सरकारी कर्मचारियों की बेमुदत हड़ताल
सरकार ने दी ‘नो वर्क-नो पे’ की चेतावनी
दीपक पवार
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र की महायुति सरकार (‘Mahayuti’ government) और राज्य के 17 लाख कर्मचारियों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। अपनी मांगों को लेकर पिछले दो वर्षों से संघर्ष कर रहे सरकारी कर्मचारी कल, मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा रहे हैं। इस हड़ताल से मंत्रालय से लेकर तहसील कार्यालयों, स्कूलों और अस्पतालों (Tehsil offices, schools, and hospitals) तक की सेवाएं ठप होने की आशंका है। कर्मचारी समन्वय समिति के विश्वास काटकर के अनुसार, सरकार ने 1 मार्च 2024 से संशोधित पेंशन योजना (revised pension scheme) लागू करने की घोषणा तो की, लेकिन इसकी आधिकारिक अधिसूचना आज तक जारी नहीं हुई। इसके अभाव में सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के लाभ नहीं मिल पा रहे हैं, जिसे कर्मचारी एक बड़ा धोखा मान रहे हैं।
17 प्रमुख मांगों का चार्टर
कर्मचारी केवल पेंशन ही नहीं, बल्कि कई अन्य प्रमुख मांगों पर भी अड़े हैं- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों और ड्राइवरों के रिक्त पदों को तत्काल भरना। सेवानिवृत्ति की आयु सीमा को 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष करना। संविदा पर काम कर रहे कर्मचारियों की सेवाओं को स्थाई करना। व्यापक स्वास्थ्य बीमा और क्लर्कों के वेतनमान में सुधार।
सरकार की सख्त चेतावनी
हड़ताल को विफल करने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। आवश्यक सेवाओं में मेस्मा कर्मचारियों पर इस कानून के तहत कड़ी कार्रवाई होगी। हड़ताल में शामिल होना ‘कदाचार’ माना जाएगा और सर्विस ब्रेक जैसी कार्रवाई हो सकती है। ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के सिद्धांत पर हड़ताल की अवधि का वेतन नहीं दिया जाएगा।
संवादहीनता और 15 महीने का इंतजार
राज्य सरकारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के भाऊसाहेब पठान का आरोप है कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मुख्य सचिव स्तर पर चर्चा का आश्वासन दिया था, लेकिन पिछले 15 महीनों में कोई ठोस बैठक नहीं हुई। संगठनों का कहना है कि सरकार ने चर्चा के रास्ते बंद कर दिए हैं, इसलिए अब हड़ताल ही अंतिम विकल्प है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि वे खुद मुख्यालय न छोड़ें। कार्यालयों में सुचारू कामकाज के लिए पुलिस सुरक्षा लेने और किसी भी कर्मचारी को नई छुट्टी न देने के कड़े आदेश जारी किए गए हैं।


