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Mumbai : अपनी बोली पर लाज नहीं, नाज़ करो : नीरज चोपड़ा

चोपड़ा बने बोलियों की क्रांति के ब्रांड ऐम्बैसडर

मुंबई : ओलम्पिक स्वर्ण विजेता नीरज चोपड़ा ने क्षेत्रीय बोलियों को मान सम्मान बढ़ाने के लिए बोलियों की क्रांति का हिस्सा बनने का फ़ैसला लिया है।
स्टेज ऐप के माध्यम से इंवेस्टर बने नीरज चोपड़ा। उन्होंने कहा – यह उनके जीवन का सबसे पहला और बहुत ख़ास इन्वेस्टमेंट।

बोलियों में फ़िल्म, वेब सिरीज़ बनाने वाले ओटीटी प्लेटफार्म स्टेज ऐप में इन्वेस्ट करने पर नीरज ने कहा की ‘हम हमारी मां बोली बोल कर बड़े हुए हैं । घर और गांव में हम हमारी बोली में बात करते हैं, अपने सुख दुःख एवं अन्य भावनाएं हम इसी बोली में प्रदर्शित करते हैं पर शहर में हम इसे बोलने में हिचकिचाते हैं।’
नीरज ने कहा की ‘भले ही बोलियों का कोई व्याकरण नहीं है पर क़िस्से, कहानियां, लोक कथाएं सब बोलियों का अभिन्न अंग हैं। जितना साहित्य बोलियों में मिलता है उतना अन्य किसी भाषा में नहीं मिलता।’

नीरज ने पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा की ‘जिस बोली को बोलते बोलते हम बड़े हुए हैं आज उसी बोली को ना बोलकर हम उसे क्यों छोटा कर रहे हैं ? अपनी बोली में भावनाएं जितनी आसानी से व्यक्त की जाती है उतनी आसानी से किसी और बोली में ऐसा नहीं हो सकता। जब कभी मुझे अंग्रेज़ी में बोलना होता है तो मैं सोचता अपनी मां बोली में ही हूं।’

स्टेज ऐप के फाउंडर विनय सिंघल ने कहा ‘ आज के इस भौतिकतावादी युग में ज़रूरत है अपनी बोलियों को बचाने की, और इसे हम तभी बचा पाएंगे जब हम इसे बोलने से ना बचें, ना झिझकें।’

नीरज ने कहा ‘स्टेज ऐप ने बोलियों को मान-सम्मान दिलवाने में हर सम्भव कोशिश की है और इनकी इसी कोशिश ने मुझे प्रेरित किया और अब मैं इस क्रांति के साथ हूं और अपनी तरफ़ से इस क्रांति को आगे बढ़ाने में मदद करूंगा।’
स्टेज राजस्थानी बोली में भी काम करता है और व्यक्तिगत रूप से मैं राजस्थान से बहुत जुड़ा हूं , मेरी प्रेरणा महाराणा प्रताप हैं। महाराणा प्रताप का शस्त्र भाला है और भाला ही मेरा खेल है ।

स्टेज के संस्थापक विनय सिंघल ने कहा कि ‘नीरज चोपड़ा को ब्रांड से जोड़ने के पीछे हमारा सबसे बड़ा कारण यही था कि नीरज अपनी मां बोली को भरपूर सम्मान देते हैं। भले ही नीरज आज पूरे विश्व का चेहरा हैं पर अपने अधिकतर इंटर्व्यू वे अपनी मां बोली में ही देते हैं। जब इतने बड़े वैश्विक चेहरे को हरियाणवी बोलने में झिझक महसूस नहीं होती तो फिर आम आदमी को किस बात की झिझक। नीरज अपने खेल से तो युवाओं के लिए प्रेरणा है ही, साथ ही युवाओं को नीरज के अपनी बोली और संस्कृति के प्रति प्रेम से भी प्रेरणा लेनी चाहिए।’

स्टेज के सह संस्थापक शशांक वैष्णव और प्रवीण सिंघल ने कहा कि ‘नीरज के स्टेज के साथ आने से क्षेत्रीय बोलियों के प्रति युवाओं का प्रेम और सम्मान बढ़ेगा और स्टेज हमेशा बोलियों को आगे बढ़ाने में प्रयासरत रहेगा। जहां हरियाणा और राजस्थान के युवा मुंबई में फ़िल्म और टेलिविज़न में काम करने के लिए मुंबई में संघर्ष करते थे आज स्टेज के आने के बाद युवाओं को मुंबई जाने की ज़रूरत महसूस नहीं होती। हरियाणा और राजस्थान के फ़िल्म मेकर जहां फ़िल्म बनाने के लिए संघर्षरत थे, आज इन प्रदेशों में हर महीने पांच से छ वेब सिरीज़ और फ़िल्मों के शूट हो रहे हैं।’

आपको बता दें, स्टेज ऐप ने क्षेत्रीय बोलियों के लेखकों, अभिनेताओं और फ़िल्म से जुड़े अन्य रोज़गार मुहैया करवाने का भी प्रयास किया है।आने वाले समय में स्टेज पर बने क्षेत्रीय भाषा में बने कांटेंट को पूरा विश्व देखेगा।

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