spot_img

Rishikesh: खदरी में जंगली हाथी के आतंक से ग्रामीण दहशत में

ग्रामीणों की फसल चौपट कर दीवार, पालतू कुत्ते की गर्दन तोड़ी

ऋषिकेश:(Rishikesh) श्यामपुर न्याय पंचायत की ग्राम सभा खदरी खड़क माफ में एक दांत वाले हाथी आतंक का पर्याय बना हुआ है। शनिवार की रात बोक्सा जनजाति बाहुल्य क्षेत्र वार्ड नम्बर 6 में जंगली हाथी मक्का खाने के चक्कर में विजय रयाल की गौशाला की दीवार तोड़कर आंगन में आ धमका। दीवार गिरने की आवाज सुनकर पड़ोसी निर्मला जैन, सुरेन्द्र सिंह, प्रीति देवी बाहर आये तो सामने विशालकाय जंगली हाथी को देखकर वे घबरा गए। उन्होंने बमुश्किल शोर कर हाथी को भगाया।

शोर सुनकर जंगली हाथी मोहल्ले के बीचोबीच होता हुआ गांव की ओर बढ़ गया। तीन सौ मीटर की दूरी पर स्थित स्थानीय ग्रामीण भगवती प्रसाद रयाल पुत्र प्रेम लाल रयाल ने बताया कि बीती रात को जंगली हाथी ने उनके आवास की चारदीवारी ढहा दी और उनके पालतू कुत्ते पर हमला कर गर्दन तोड़ दी। जंगली हाथी के हमले से कुत्ता डरा सहमा हुआ है और दर्द से चिल्ला रहा है।

स्थानीय निवासी और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला गंगा सुरक्षा समिति के नामित सदस्य पर्यावरणविद विनोद जुगलान का कहना है कि एक ओर गांव की सीमा पर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थान के समीप गुलदार की आमद से ग्रामीण भयभीत हैं। वह मवेशियों को अपना शिकार बना रहा है तो दूसरी ओर आबादी क्षेत्र में अब तक जंगली हाथी ने एक दर्जन के लगभग चहारदीवारी ढहा दी हैं।

भारी बर्षात के कारण चारों ओर जलभराव है। ऐसे में रात को कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। वन्यजीवों की आमद से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। स्थानीय कृषक ललित सिंह का कहना है कि जंगली हाथी बीते वर्षों से सौंग नदी की ओर से जिस स्थान पर बाड़ तोड़ कर खेतों में दाखिल होता है। इस बार भी उसी जगह से आ रहा है। इसके बावजूद वन विभाग उस जगह को अभी तक बंद नहीं कर सका है। साल दर साल सिर्फ आश्वासन के अलावा कुछ नहीं हो रहा है। सौर ऊर्जा बाड़ का कार्य भी लम्बित पड़ा हुआ है।

क्षेत्र पंचायत सदस्य श्रीकान्त रतूड़ी ने कहा कि वन विभाग द्वारा रात्रि गश्त बढ़ाने की बात भी झूठ साबित हो रही है। ऐसे में अगर वन्यजीवों के कारण कोई भी हादसा होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। विनोद जुगलान ने सौंग नदी की ओर सुरक्षा दीवार और सौर ऊर्जा बाड़ निर्माण शीघ्र शुरू करने की मांग की है।

Explore our articles