मास्टर पृथ्वीनाथ गर्ग ने सजा के दौरान सुविधाएं नहीं ली
यमुनानगर:(Yamunanagar ) देश की आजादी में अनेकों वीर जवानों ने अपनी जान पर खेलकर अनेकों यातनाएं सहकर, शहादत देकर अंग्रेजों के चंगुल से देश को आजाद कराया। ऐसे ही वीर सपूत थे जगाधरी के मास्टर पृथ्वीनाथ गर्ग जिन्होंने देश के खातिर अपना सर्वत्र जीवन बलिदान किया। उन्होंने कैदी के रूप में सजा काटी। अंग्रेजों ने उन्हें बी क्लास की जेल की सुविधा दी। लेकिन मास्टरजी ने सी क्लास के कैदी के रुप मे ही रहकर की सजा काटी।
सन 1946 में मास्टर पृथ्वीनाथ गर्ग जगाधरी वापस आए। यहां आकर उनका मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ। जेल में लंबे समय तक यातनायें भुगतने के कारण उनका शरीर काफी अस्वस्थ हो गया और 28 दिसंबर 1955 की रात को दुनिया को अलविदा कह गए।
जगाधरी के अशोक गर्ग ने बताया कि उनके पिता दर्शन लाल गर्ग भी बड़े भाई के पद चिन्हों पर चलते हुए स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। दर्शन लाल गर्ग ने शिमला में नेशनल ग्रीनलैंड बैंक में जॉब करते समय खादी टोपी पहननी मंजूर की। अशोक के अनुसार इसी टोपी पहनने पर प्रतिदिन अंग्रेजी पुलिस रोजाना दो डंडे मारती थी। पिताजी ने डंडे खाये, लेकिन टोपी पहननी नहीं छोड़ी। आजादी के पश्चात दर्शन लाल, दरबारी लाल जगाधरी स्टेट बिजली बोर्ड जैस्को में अपने साथ जगाधरी ले आए।
अशोक के अनुसार मास्टर पृथ्वी नाथ गर्ग और दर्शन लाल गर्ग के नाम जो भी पत्र आते थे। अंग्रेजी सरकार के आदमी उन्हें खोलकर अवश्य पढ़ते थे। उन्होंने बताया कि उस समय मास्टर पृथ्वीनाथ, दर्शन लाल गर्ग, शिवप्रसाद गर्ग ,पंडित बृजराज शरण,पंडित मधुसुदन,जगदीश माशा,अभय कुमार सिंह इत्यादि साथियों के साथ चौक बाजार में चबूतरों पर एकत्र हो आजादी को लेकर चुपके से रणनीति बनाते थे। वहीं अखिल भारतीय अग्रवाल सम्मेलन के पदाधिकारी आशीष मित्तल आदि का कहना है कि उनका प्रयास इनकी स्मृति में शहर में कुछ बनवाने का है। उनका कहना है कि इन महान स्वतंत्रता सेनानियों के जीवन से


