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Mumbai : मुंबई पुलिस की बड़ी चूक

गिरफ्तारी की वजह समझाना जरूरी, केवल मेमो पर दस्तखत काफी नहीं: कोर्ट
मुंबई : (Mumbai)
मुंबई की एक अदालत (Mumbai court) ने गिरफ्तारी प्रक्रिया में गंभीर खामियों को उजागर करते हुए एक POCSO आरोपी (POCSO accused) को रिहा कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी को उसकी समझ की भाषा में गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दी गई, जो कानून का उल्लंघन है। मामला कर्नाटक के मंगलुरु निवासी अनिरुद्ध विजयकुमार से जुड़ा है, जिसे पवई पुलिस ने गिरफ्तार किया था। आरोपी को मराठी भाषा की समझ नहीं होने के बावजूद पुलिस ने उसे मराठी में तैयार अरेस्ट मेमो थमा दिया। इस आधार पर अदालत ने गिरफ्तारी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए।

कोर्ट का सख्त रुख
दिंडोशी की सिटी सिविल और सेशंस कोर्ट में एड-हॉक जज एस.एन. सचदेव (Ad-hoc Judge S.N. Sachdev of the Dindoshi City Civil and Sessions Court) ने कहा कि सिर्फ दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाना पर्याप्त नहीं है, जब तक यह सुनिश्चित न हो कि आरोपी उसे समझ भी रहा है। अदालत ने इसे आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन माना।

कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 47 और 48 का पालन नहीं किया। इन धाराओं के तहत आरोपी को गिरफ्तारी का कारण उसकी समझ की भाषा में बताना अनिवार्य है।

परिवार को सूचना देने में भी चूक
अदालत ने यह भी पाया कि आरोपी के परिवार को समय पर सूचना देने में भी लापरवाही बरती गई। यह भी गिरफ्तारी प्रक्रिया में एक गंभीर कमी मानी गई।

जमानत पर रिहाई का आदेश
इन खामियों को देखते हुए अदालत ने आरोपी को 30,000 रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही जांच अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

अगली सुनवाई 18 मई को
मामले की अगली सुनवाई 18 मई को तय की गई है, जिसमें पुलिस को अपनी प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देना होगा। यह मामला दर्शाता है कि गिरफ्तारी जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी बड़े कानूनी फैसलों को प्रभावित कर सकती है।

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