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THANE : वन जमीन के कारण रोड का विस्तारीकरण में बाधा

घोड़बंदर परिसर के लिए मंजूर की गई योजनाएं ठंडे बस्ते में डाल दिया गया

ठाणे : घोड़बंदर परिसर में कई ऐसी समस्याएं हैं, जिसके कारण यहां के लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि घोड़बंदर रोड कई जगहों पर वन विभाग की जमीन से बाधित हो रहा है। जिस कारण वहां रोड का विस्तारीकरण नहीं हो पाया। इसके साथ ही सबसे अधिक दुख की बात यह है कि हाल ही के दिनों में घोड़बंदर परिसर के लिए जो भी योजनाएं मंजूर की गई निधि की कमी का हवाला देकर उन विकास प्रस्तावों को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इन बातों का जिक्र करते हुए ठाणे के पूर्व उपमहापौर नरेश मणेरा ने कहा कि इसके लिए केंद्र की भाजपा सरकार के साथ ही एकनाथ शिंदे गुट जिम्मेदार है। स्वयं राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे लगातार राज्य मंत्रिमंडल में शामिल रहे और उसके विभाग के अधीन ही घोड़बंदर रोड आता था। लेकिन घोड़बंदर रोड की दुरुस्ती के लिए गत डेढ़ सालों से एक भी पैसे नहीं दिए गए। घोड़बंदर रोड के विस्तारीकरण में अब भी दशकों से वन विभाग की जमीन बाधक बनी हुई है। लेकिन पूर्व में राज्य मंत्रिमंडल में शामिल रहते हुए भी वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस समस्या के समाधान के लिए प्रयास नहीं किया।
शिंदे के ढुलमुल रवैए के कारण जमीन का हस्तांतरण नहीं हो पाया
घोड़बंदर रोड के पतलीपाड़ा, डोंगरीपाड़ा, पंचामृत और गायमुख में घोड़बंदर रोड का पूर्ण विस्तारीकरण फॉरेस्ट लैंड के कारण नहीं हो पा रहा है। इन बातों की जानकारी देते हुए नरेश मणेरा ने कहा कि भाजपा की उदासीनता और राज्य के तत्कालीन मंत्री एकनाथ शिंदे के ढुलमुल रवैए के कारण जमीन का हस्तांतरण नहीं हो पाया । मणेरा ने केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मांग की है कि घोड़बंदर रोड के विस्तारीकरण में बाधक बनी वन विभाग की जमीन का निष्पादन किया जाए। मणेरा ने बताया कि मेट्रो परियोजना ठाणे में शुरू करने से पहले इसे पैदा होने वाली समस्या को लेकर किसी भी तरह की उपाय योजना नहीं की गई ।यदि मेट्रो परियोजना के पहले कोस्टल रोड बना दिया गया होता तो यातायात जाम की समस्या ठाणे के नागरिकों को नहीं झेलनी पड़ती।
घोड़बंदर रोड पर पंचामृत के पास फुटओवर ब्रिज को पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
वहीं घोड़बंदर की कई विकास योजनाओं पर भी रोक लगा दी गई है । इन विकास प्रस्तावों को न केवल मंजूरी मिली है, बल्कि इसके लिए टेंडर भी निकला है। इसके बाद भी इन विकास प्रस्तावों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है । इन बातों का जिक्र करते हुए नरेश मणेरा ने कहा कि यह स्थिति भी एकनाथ शिंदे गुट के कारण आई है । उन्होंने बताया कि घोड़बंदर रोड पर पंचामृत के पास फुटओवर ब्रिज को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है । टेंडर भी निकला। लेकिन उसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही साढ़े तीन एकड़ जमीन जो हिलस्प्रिंग सोसाइटी के सामने हे,वहां साढ़े पांच करोड़ की लागत से गार्डन का निर्माण किया जाना था । गार्डन निर्माण को लेकर ठाणे मनपा की महासभा में प्रस्ताव को मंजूरी भी मिली थी। लेकिन इस प्रस्ताव को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है । मणेरा ने बताया कि घोड़बंदर परिसर में कसारवाडावली से लेकर मोगरपाड़ा गांव तक रोड निर्माण को मंजूरी मिली थी। निधि की कमी का हवाला देकर उसे भी रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि घोड़बंदर परिसर में पिछले पांच सालों में जितने भी डीपी रोड बने हैं, किसी भी रोड पर स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है।

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