
मुंबई : (Mumbai) मुंबई के नगर निकाय (बीएमसी) अस्पतालों (Mumbai’s municipal body (BMC) hospital) के रेजिडेंट डॉक्टरों ने बुधवार को एक प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। जुलाई 2024 से लंबित महंगाई भत्ते (DA) (Dearness Allowance (DA)) की बढ़ोतरी लागू न होने के कारण डॉक्टरों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। विरोध स्वरूप डॉक्टरों ने हाथों पर काली पट्टी बांधकर अपना काम जारी रखा, ताकि मरीजों के इलाज में कोई बाधा न आए। डॉक्टरों का कहना है कि अब तक उनकी मांगें केवल बैठकों और ज्ञापनों तक सीमित थीं, लेकिन प्रशासन की निष्क्रियता के कारण अब उन्हें सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराना पड़ रहा है। ‘बीएमसी मार्ड’ (‘BMC MARD’) के नेतृत्व में करीब एक हजार रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। मुंबई के इन प्रमुख चिकित्सा संस्थानों, जैसे केईएम, बीवाईएल नायर, सायन और कूपर अस्पताल (KEM, BYL Nair, Sion, and Cooper Hospitals) के डॉक्टरों ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (Maharashtra Association of Resident Doctors) के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार द्वारा सरकारी प्रस्ताव (GR) जारी किए जाने के बावजूद, बीएमसी के तहत आने वाले डॉक्टरों के लिए जुलाई 2024 से लंबित डीए बढ़ोतरी लागू नहीं की गई है। देरी के कारण डॉक्टरों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है और उनका एरियर (बकाया राशि) बढ़ता जा रहा है। डॉक्टरों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि अन्य क्षेत्रों में समान लाभ दिए जा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ माने जाने वाले इन डॉक्टरों की अनदेखी की जा रही है। अगस्त 2025 से लगातार फॉलो-अप के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
शुक्रवार से तेज होगा आंदोलन
हालांकि बुधवार का प्रदर्शन शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक था, लेकिन ‘मार्ड’ ने प्रशासन को कड़ा संदेश दिया है। मार्ड का कहना है कि हमने लंबे समय तक धैर्य रखा है, लेकिन अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। अगर प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो शुक्रवार से यह आंदोलन पूर्ण विरोध प्रदर्शन में बदल जाएगा, जिसमें और भी अधिक संख्या में डॉक्टर शामिल होंगे।


