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Jabalpur : बकरियों की विशेष नस्ल तैयार कर रहे वैज्ञानिक

जबलपुर : नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक बकरियों की विशेष नस्ल तैयार कर रहे हैं, आकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में लगभग एक करोड़ 10 लाख बकरियां हैं, लेकिन न तो इनकी नस्लों को लेकर प्रदेश में कोई शोध हुआ, न ही क्षेत्र विशेष और खासियत के आधार पर इन्हें अब तक पहचान मिल सकी है। अब यह काम पशु वैज्ञानिक करने जा रहे हैं। वे बकरियों पर शोध कर उनकी खासियत और उपयोगिता के आधार पर नस्लों का विभाजन करेंगे। इतना ही नहीं प्रदेश की सीमा से लगे अन्य राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा में मिलने वाली बकरियों की प्रजातियों की खूबियों को मध्य प्रदेश की बकरियों में लाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान भी कराया जाएगा।

नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक मादा पशु रोग एवं प्रसूति विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एसएन शुक्ला ने बताया कि मध्य प्रदेश में आज लगभग एक करोड़ से ज्यादा बकरियां हैं, लेकिन इनकी न तो कोई क्षेत्र विशेष और खासियत के आधार पर नस्लें हैं और न ही इसे बढ़ाने व संरक्षित करने के लिए कोई शोध हुआ है। वेटरनरी विज्ञानी की मदद से पहली बार हम यह काम करेंगे। इस शोध के जरिए उन्नत किस्म के बकरे का प्रजनन पर अध्ययन कर उनकी नस्ल का बढ़ाने का काम करेंगे। शोध के जरिए मध्य प्रदेश में क्षेत्र और खासियत के आधार पर बकरा-बकरी की नस्ल को पहचान दिलाने का काम होगा। वेटरनरी विश्वविद्यालय पहली बार बकरी में कृत्रिम गर्भाधान कर बकरे और बकरी की उन्नत नस्लों को तैयार करेंगे।

प्रदेश की बकरी की नस्ल में सुधार करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान किया जाएगा, लेकिन इसके लिए मध्यप्रदेश में बकरे के सीमेन को निकालने और संरक्षित रखने के लिए न तो कोई प्रयोगशाला और न ही कोई बैंक है। इस प्रोजेक्ट के जरिए पशु विज्ञानिक मध्यप्रदेश और इसकी सीमा से लगे आसपास के प्रदेशों के बकरे के सीमेन को संरक्षित कर बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान के जरिए नस्ल सुधारेंगे। पहले चरण में विवि शोध के जरिए बकरे की खास नस्ल के सीमेन के लिए विश्वविद्यालय बकरे भी खरीदेंगा। वर्तमान में विवि के आमानाला परियट स्थित बकरी फार्म में दो प्रजातियों के बकरे हैं। इसमें राजस्थान के सोही नस्ल और माथुरा की बरबरी नस्ल है। इसके बाद इटावा की जमुनापारी नस्ल पर भी काम होगा।

वेटरनरी विश्वविद्यालय के मादा पशु रोग एवं प्रसूति विभाग को केंद्र सरकार के नेशनल लाइव स्टाक मिशन के तहत यह काम करने के लिए प्रोजेक्ट मिला है। इसमें उन्हें न सिर्फ प्रदेश की बकरियों की नस्लों का पहचान दिलाना है, बल्कि प्रयोगशाला तैयार कर उसमें मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों में मिलने वाली बकरे की प्रजातियों के सीमेन को संरक्षित भी करना है।

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