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New Delhi/Mumbai : संकट का लिटमस टेस्ट

New Delhi/Mumbai: The Litmus Test of Crisis

नई दिल्ली/मुंबई : (New Delhi/Mumbai) देश में इन दिनों सरकारों और मंत्रियों के कदम केवल प्रतीकात्मक नहीं दिख रहे, बल्कि वे एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट की चेतावनी जैसे नजर आने लगे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) द्वारा ईंधन बचाने की अपील के बाद जिस तरह केंद्र और राज्यों की सरकारें अचानक मितव्ययिता मोड में आ गई हैं, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री मोटरसाइकिल से विधान भवन पहुंच रहे हैं, मंत्री पैदल मंत्रालय जा रहे हैं, सरकारी काफिले आधे किए जा रहे हैं, विदेश यात्राएं रोकी जा रही हैं और वर्क फ्रॉम होम लागू किया जा रहा है। यह सब केवल ईंधन बचत अभियान है या फिर आने वाले आर्थिक दबाव का ‘लिटमस टेस्ट’? क्या सरकारें जनता को धीरे-धीरे कठिन आर्थिक परिस्थितियों के लिए तैयार कर रही हैं?

मोटरसाइकिल, पैदल यात्रा और आधे काफिले
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस , (Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis) गुरुवार को अपने सरकारी आवास ‘वर्षा’ से मोटरसाइकिल पर विधान भवन पहुंचे। उनके साथ भाजपा नेता और मंत्री आशीष शेलार भी मौजूद थे। दूसरी ओर राज्य मंत्री नितेश राणे ने मंत्रालय तक पैदल जाकर बैठक में हिस्सा लिया। महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या आधी करने, विदेश दौरों पर रोक लगाने और सरकारी खर्च सीमित करने जैसे फैसले लिए हैं। यह केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहा।

दिल्ली से आंध्र तक वर्क फ्रॉम होम
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Delhi Chief Minister Rekha Gupta) ने सप्ताह में दो दिन घर से काम की व्यवस्था लागू करने, 50 प्रतिशत ऑनलाइन बैठकें करने और सरकारी विभागों के ईंधन कोटे में 20 प्रतिशत कटौती के निर्देश दिए हैं। मंत्रियों और विधायकों को मेट्रो तथा डीटीसी बसों से यात्रा करने की सलाह दी गई है। आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश ने भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या 50 प्रतिशत घटाने का निर्णय लिया है।

ई-रिक्शा से मंत्री और एसी पर नियंत्रण
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में रेलवे स्टेशन से घर तक ई-रिक्शा से यात्रा कर ईंधन बचत का संदेश दिया। वहीं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को काफिले सीमित रखने का निर्देश दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) ने सचिवालयों में एसी का तापमान 24 से 26 डिग्री के बीच रखने, लिफ्ट का सीमित उपयोग करने और साझा वाहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के निर्देश दिए हैं। 50 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में सप्ताह में कम से कम दो दिन घर से काम की व्यवस्था अपनाने को कहा गया है।

चीनी निर्यात पर रोक ने बढ़ाई चिंता
सरकार ने चीनी के निर्यात पर 30 सितंबर तक प्रतिबंध लगा दिया है। इसका कारण घरेलू उत्पादन और खपत के बीच बढ़ता अंतर बताया जा रहा है। अनुमान है कि चालू सीजन में चीनी उत्पादन 280 लाख टन से कम रहेगा, जबकि घरेलू मांग इससे अधिक है। सरकार को आशंका है कि निर्यात जारी रहने पर घरेलू बाजार में कीमतें और तेजी से बढ़ सकती हैं। इसलिए निर्यात रोककर घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है। यह फैसला भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार महंगाई और आपूर्ति संकट को लेकर सतर्क हो चुकी है।

सोने के आयात पर भी सख्ती
केंद्र सरकार ने शुल्क-मुक्त सोने के आयात नियमों को सख्त करते हुए एडवांस ऑथराइजेशन योजना के तहत प्रति लाइसेंस अधिकतम 100 किलो सोने की सीमा तय कर दी है। इससे पहले सरकार सोने पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर चुकी है। सरकार का मानना है कि अत्यधिक सोना आयात विदेशी मुद्रा भंडार और आयात बिल पर दबाव बढ़ा रहा है। इसलिए आयात नियंत्रण के जरिए डॉलर की बचत और चालू खाते के दबाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।

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