spot_img

Mumbai : महाराष्ट्र स्लम एक्ट की समीक्षा का आदेश

Mumbai: Order Issued to Review Maharashtra Slum Act

समीक्षा के लिए बनेगा विशेषज्ञ पैनल
मुंबई : (Mumbai)
बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) का यह निर्देश महाराष्ट्र में शहरी पुनर्विकास और आवास नीति (urban redevelopment and housing policy in Maharashtra) के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि दशकों पुराने ‘स्लम एक्ट’ (‘Slum Act’) की समीक्षा अब समय की मांग है। अदालत ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर एक हाई-लेवल एक्सपर्ट पैनल गठित करने का आदेश दिया है। यह समिति ‘महाराष्ट्र स्लम एरिया एक्ट’ (‘Maharashtra Slum Areas Act’) की प्रभावशीलता की जांच करेगी, इसकी कानूनी खामियों को पहचानेगी और इसमें सुधार के लिए ठोस सुझाव देगी।

परफॉर्मेंस ऑडिट और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
जस्टिस जी.एस. कुलकर्णी और जस्टिस अद्वैत सेठना (Justice G.S. Kulkarni and Justice Advait Sethna) की पीठ ने कहा कि अब इस कानून का ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ अनिवार्य है। पैनल का लक्ष्य एक ऐसी व्यवस्थित और वैज्ञानिक कार्यप्रणाली विकसित करना है जिससे शहरी पुनर्विकास को सही और आधुनिक दिशा मिल सके।

टाउन प्लानिंग पर तीखी प्रतिक्रिया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टाउन प्लानिंग की वर्तमान स्थिति पर निराशा व्यक्त की। कोर्ट ने कहा, “ऐसी कोई भी टाउन प्लानिंग जो समय के साथ नहीं चलती, वह संदिग्ध है।” बेंच ने चिंता जताई कि मुंबई जैसे वैश्विक शहर में आज भी एक बड़ा हिस्सा झुग्गियों से ढका हुआ है, जो प्रगति के दावों पर सवाल खड़ा करता है।

एरिया-वाइज प्लानिंग की अपील
अदालत ने सरकार को सुझाव दिया कि छिटपुट या छोटे-छोटे सुधारों के बजाय ‘क्षेत्र-वार योजना’ (‘area-wise planning’) पर ध्यान केंद्रित किया जाए। इससे पूरे इलाके का एक साथ कायाकल्प हो सकेगा और सार्वजनिक भूमि का प्रबंधन बेहतर होगा। कोर्ट ने माना कि झुग्गियों को पूरी तरह समाप्त करना एक “बेहद कठिन कार्य” (Herculean Task) है। हालांकि, बेंच ने यह भी जोड़ा कि यदि सरकार की इच्छाशक्ति मजबूत हो और जनहित के प्रति निष्ठा हो, तो मुंबई को झुग्गी-मुक्त बनाने का सपना साकार किया जा सकता है।

Explore our articles