
मूल अपराध खत्म होने के आधार पर मिली राहत, ईडी का मामला भी हुआ बंद
मुंबई : (Mumbai) मुंबई की विशेष सत्र अदालत (Special Sessions Court in Mumbai) ने महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटाले (Maharashtra State Cooperative Bank scam) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले (money laundering case) में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) (Nationalist Congress Party (Sharad Pawar faction)) के विधायक रोहित पवार और (Rohit Pawar)उनके सहयोगियों को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला तभी टिक सकता है जब कोई मूल अपराध अस्तित्व में हो। चूंकि मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मूल मामले में ‘क्लोजर रिपोर्ट’ दाखिल कर दी थी और अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया था, इसलिए रोहित पवार के खिलाफ ईडी का मामला तकनीकी और कानूनी रूप से स्वतः ही कमजोर हो गया। अदालत ने केवल रोहित पवार ही नहीं, बल्कि उनके करीबी सहयोगी व्यवसायी राजेंद्र इंगवले (businessman Rajendra Ingawale)और अन्य पांच आरोपियों के आवेदनों को भी मंजूर कर लिया। सांसदों और विधायकों के लिए गठित विशेष अदालत के न्यायाधीश महेश जाधव ने सभी पक्षों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।
ईडी के गंभीर आरोप
प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी चार्जशीट में कन्नड़ सहकारी चीनी कारखाने (Kannad Cooperative Sugar Factory) की नीलामी प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। बैंक ने 2012 में कारखाने को कथित तौर पर वास्तविक कीमत से बहुत कम दाम में नीलाम किया। ईडी का दावा था कि नीलामी में शामिल दूसरी कंपनियां रोहित पवार की ‘बारामती एग्रो’ से ही जुड़ी थीं और पूरी प्रक्रिया महज एक औपचारिकता थी।
कोर्ट के रुख में बदलाव
शुरुआती जांच के दौरान, विशेष अदालत ने ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा था कि ‘प्रथम दृष्टया’ रोहित पवार नीलामी की गड़बड़ी में शामिल लग रहे हैं। हालांकि, EOW की क्लोजर रिपोर्ट आने और कानूनी बारीकियों के विश्लेषण के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि अब मामला चलाने का कोई ठोस आधार नहीं बचा है।


