
वाशिंगटन/तेहरान : (Washington/Tehran) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (U.S. President Donald Trump) ने सोमवार को कहा कि ईरान पर बुधवार को इस्लामाबाद में दूसरे दौर की शुरू होने वाली बातचीत में शामिल होने का कोई दबाव नहीं है। इस वार्ता में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President J.D. Vance) करने वाले हैं। ट्रंप का बयान इस वार्ता के संदर्भ में ईरान की टिप्पणी के बाद आया है। ईरान ने कहा कि उसकी इस्लामाबाद वार्ता में हिस्सा लेने की अभी कोई योजना नहीं है।
अमेरिकी सेना की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर तनाव सप्ताहांत में और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने एक ईरानी जहाज पर गोलीबारी कर उसे जब्त कर लिया है। इसके बाद तेहरान ने अपने बंदरगाहों और निर्यात पर जारी नाकाबंदी के बीच कूटनीति वार्ता को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया। सात सप्ताह से चल रहे इस युद्ध के कूटनीतिक समाधान का कोई स्पष्ट रास्ता न निकलने से स्थिति और पेचीदा हो गई है। इस सप्ताह अमेरिका-ईरान युद्ध विराम की समाप्ति के कारण और होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने की अनिश्चितता से वैश्विक तेल की कीमतों में इजाफा हुआ है। इससे अमेरिकी शेयर बाजार पर दबाव है।
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि समझौता करने के लिए ईरान पर “बिल्कुल भी कोई दबाव नहीं है।” उन्होंने सोमवार देर रात यह भी कहा कि ईरान से संवर्धित यूरेनियम लाना एक “लंबी और कठिन प्रक्रिया” होगी। ट्रंप ने कहा कि पिछले साल तेहरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका ने हमला किया था। तब से हालात काफी बदल चुके हैं। इसलिए ईरान से यूरेनियम हासिल करना “लंबी” और “कठिन” प्रक्रिया होगी। उन्होंने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा, “ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत ईरान में मौजूद ‘न्यूक्लियर डस्ट’ (परमाणु धूल) वाले ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। इसलिए अब उसे जमीन से खोदकर बाहर निकालना बहुत मुश्किल है।”
अमेरिका का आरोप है कि ईरान इस यूरेनियम का भंडारण इसलिए कर रहा है ताकि इसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सके। हालांकि ट्रंप का यह मानना है कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम का भंडार अंततः अमेरिकी क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया जाएगा, जबकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने ऐसी किसी भी योजना को सिरे से खारिज किया है। इजराइली अधिकारियों ने कहा है कि पिछले जून में 12 दिन का युद्ध खत्म होने के बाद से तेहरान ने परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिशें तेज कर दी हैं। सनद रहे यह युद्ध इजराइल ने शुरू किया था और इसमें अमेरिका ने तीन परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। इसमें एक एनरिचमेंट प्लांट भी शामिल था।
ट्रंप ने देर रात यह भी चेतावनी दी कि अगर ईरान बातचीत नहीं करता है तो उसे ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखी होंगी। इससे पहले दिन में उन्होंने भविष्यवाणी की कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करेगा, लेकिन अगर वह ऐसा नहीं करता गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने दोहराया कि ईरान युद्ध खत्म होने के बहुत करीब है। ट्रंप ने कहा है कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, वरिष्ठ दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर (Vice President J.D. Vance, senior envoy Steve Witkoff, and his son-in-law, Jared Kushner) अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के एक और संभावित दौर के लिए पाकिस्तान जाएंगे।
ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर गालिबफ (Mohammad Bagher Ghalibaf) ने सोमवार को एक्स पर राष्ट्रपति ट्रंप को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान, अमेरिका के साथ तब तक बातचीत स्वीकार नहीं करेगा, जब तक उस पर किसी तरह का खतरा बना रहेगा। उन्होंने कहा, “ट्रम्प नाकाबंदी लगाकर और संघर्ष विराम का उल्लंघन करके अपनी मर्जी के अनुसार बातचीत की मेज को समर्पण की मेज में बदलना चाहते हैं, या फिर से युद्ध भड़काने की अपनी कोशिशों को सही ठहराना चाहते हैं।” उन्होंने कहा, “हम किसी भी तरह के खतरे के साये में बातचीत स्वीकार नहीं करते हैं और पिछले दो सप्ताह में हमने युद्ध के लिए खुद को तैयार कर लिया है।”
उल्लेखनीय है कि गालिबफ ने 11 अप्रैल को पाकिस्तान के इस्लामाबाद में सुलह वार्ता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। इस बीच ईरान सरकार ने अमेरिका से अपने मालवाहक जहाज और उसके क्रू को रिहा करने की मांग की है।


