
नई दिल्ली : (New Delhi) मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के (ongoing tensions in the Middle East) बीच एक दिलचस्प स्थिति सामने आई है, जहां ईरान के मिसाइल हमले खाड़ी देशों और अमेरिकी ठिकानों पर ज्यादा असरदार साबित हो रहे हैं, जबकि इजराइल अपनी मजबूत एयर डिफेंस और हाईटेक सुरक्षा प्रणाली (robust air defenses and high-tech security systems) के कारण इन हमलों को काफी हद तक नाकाम करने में सफल रहा है। दूरी, तकनीकी बढ़त और उन्नत रक्षा तंत्र की वजह से इजराइल की सुरक्षा मजबूत बनी हुई है, जिसके चलते ईरान अब क्षेत्र के अन्य हिस्सों को निशाना बना रहा है।
रणनीति में बदलाव और अमेरिका को चेतावनी
ईरानी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि युद्ध का अंत ईरान की जनता तय करेगी। उन्होंने साफ किया कि अगर अमेरिका जमीनी लड़ाई में उतरता है, तो उसके सैनिकों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। ईरान ने अपनी रणनीति बदलते हुए हर हमले का और ज्यादा ताकत से जवाब देने की नीति अपनाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा नियंत्रण
ईरान ने यह भी संकेत दिए हैं कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने के लिए बड़े देशों को उसकी अनुमति की जरूरत पड़ सकती है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का नियंत्रण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
यूएई की सख्त शर्तें
वहीं संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) ने साफ किया है कि किसी भी समाधान के लिए ईरान को हमलों से हुए नुकसान की भरपाई करनी होगी और भविष्य में ऐसे हमले न करने की गारंटी देनी होगी। यूएई का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता के लिए ठोस और पारदर्शी समझौता जरूरी है।


