
बिलासपुर : (Bilaspur) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड (Chhattisgarh’s highly publicized Ramavatar Jaggi murder case) में एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के निर्देश के बाद मामला दोबारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) में पहुंचा है, जहां इसकी मेरिट पर विस्तृत सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा (Chief Justice Ramesh Sinha) की अगुवाई वाली खंडपीठ ने मामले पर प्रारंभिक सुनवाई की और अगली तारीख 1 अप्रैल निर्धारित की।
करीब 20 वर्ष पुराने इस हत्याकांड में पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए दोषियों की अपील खारिज कर दी थी। निचली अदालत ने कई आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, बाद में केंद्रीय जांच एजेंसी की अपील पर सर्वोच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए पूरे प्रकरण की पुनः समीक्षा के लिए इसे फिर से हाईकोर्ट भेज दिया।
सीबीआई ने बनाया 31 को आरोपी
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी से जुड़े नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शुरुआती जांच पर सवाल उठने के बाद राज्य सरकार ने प्रकरण को सीबीआई को सौंप दिया था। जांच के दौरान कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया, जिनमें कुछ राजनीतिक पृष्ठभूमि से जुड़े नाम भी सामने आए। इनमें से कुछ आरोपियों ने सरकारी गवाह का रुख अपनाया, जबकि अधिकांश को अदालत ने दोषी ठहराया।
एक प्रमुख आरोपी को किया बरी
मामले में एक प्रमुख आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जिसके खिलाफ पीड़ित पक्ष ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। इसी अपील के आधार पर अब यह केस पुनः विचाराधीन हुआ है। सुनवाई के दौरान पीड़ित पक्ष ने इसे एक व्यापक साजिश का हिस्सा बताते हुए सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की मांग की है।
राजनीति और व्यापार का बड़ा नाम जग्गी
रामावतार जग्गी उस दौर में प्रदेश की राजनीति और व्यापारिक जगत (Jaggi was a well-known name in both the political and business circle) का जाना-पहचाना नाम थे। उनकी हत्या ऐसे समय में हुई थी, जब राज्य में राजनीतिक हलचल अपने चरम पर थी। अब एक बार फिर यह मामला अदालत में चर्चा के केंद्र में है और आगामी सुनवाई से इसके कानूनी परिणामों पर सबकी नजरें टिकी हैं।
चर्चित मामलों में से एक जग्गी हत्याकांड
जग्गी हत्याकांड छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक है, जिसमें राजनीति, व्यवसाय और आपराधिक साजिश के कई पहलू जुड़े रहे। यह मामला आज भी न्यायिक प्रणाली में लंबित प्रक्रियाओं और जटिल जांच का उदाहरण माना जाता है। यह हत्या उस समय हुई जब प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज थी, इसलिए इस घटना ने तुरंत ही बड़ा राजनीतिक और आपराधिक मामला का रूप ले लिया।


