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Shimla : हिमाचल में सर्दी का कहर, निचले इलाके हिल स्टेशनों से ज्यादा ठंडे, कोहरे का येलो अलर्ट

शिमला : (Shimla) हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में ठंड का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है और हालात ऐसे हैं कि निचले और मैदानी जिलों में हिल स्टेशनों से ज्यादा ठिठुरन है। जनजातीय क्षेत्रों में तापमान लगातार माइनस में बना हुआ है, जिससे जीवन ठहर सा गया है। राज्य के सबसे ठंडे स्थानों में आज लाहौल स्पीति जिला के ताबो में न्यूनतम तापमान माइनस 7.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि इसी जिला के कुकुमसेरी में पारा माइनस 5.7 और किन्नौर के कल्पा में माइनस 0.4 डिग्री रहा।

इसके अलावा भुंतर 1.2, मनाली 1.3, सोलन 2.7, भरमौर 6.2, ऊना 6.0, कांगड़ा 4.6, सुंदरनगर 2.0, मंडी 4.7, पालमपुर 4.0, बिलासपुर 7.2, देहरा गोपीपुर 7.0, जुब्बड़हट्टी 7.6, धर्मशाला 5.5, शिमला 8.0, कु्फरी 7.5, नारकंडा 5.2, सराहन 5.3, नाहन 10.0, पांवटा साहिब 10.0 और नेरी 9.7 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। सबसे तीखी ठंड मैदानी क्षेत्रों में महसूस की जा रही है, जहां हमीरपुर में इस सीजन की सबसे सर्द रात दर्ज हुई और पारा 3.7 डिग्री तक लुढ़क गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री कम है।

इसी तरह सुंदरनगर, मंडी, कांगड़ा, ऊना, बिलासपुर, सोलन, धर्मशाला, पालमपुर और देहरा गोपीपुर जैसे निचले इलाके तापमान के मामले में शिमला और कु्फरी से अधिक ठंडे रहे। आज सुबह मंडी और बिलासपुर में कोहरे के कारण दृश्यता केवल 100-100 मीटर दर्ज की गई। मौसम विभाग ने मैदानी और निचले क्षेत्रों में सुबह व शाम घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया है, जो अगले दो दिन प्रभावी रहेगा। राज्य का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.3 डिग्री कम दर्ज हुआ है, जबकि पिछले 24 घंटों में औसत तापमान में 0.1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। इस माह वर्षा लगभग न होने से सूखी ठंड लोगों के लिए परेशानी बनी हुई है और सुबह-शाम व रात को ठिठुरन चरम पर है।

मौसम विज्ञान केंद्र (Meteorological Center) शिमला के अनुसार अगले एक हफ्ते यानी 4 दिसंबर तक मौसम साफ रहने के आसार हैं, ऐसे में रात के तापमान में और गिरावट संभव है तथा मैदानी व निचले क्षेत्रों में घना कोहरा जारी रह सकता है। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पारा लगातार माइनस में बना हुआ है और वहां के लोगों को ठंड से जूझने के लिए विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं। इन इलाकों में पानी के प्राकृतिक स्त्रोत जम गए हैं।

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