नई दिल्ली : (New Delhi) भारतीय मूल की ब्रिटिश उपन्यासकार और कवि निताशा कौल (Indian-born British novelist and poet Nitasha Kaul) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर भारत में प्रवेश करने की अनुमति पर रोक लगाने और ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) के दर्जे को निरस्त करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती दी है। जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच (A bench headed by Justice Sachin Datta) इस याचिका पर कल यानि 25 नवंबर को सुनवाई करेगा।
निताशा कौल 24 फरवरी 2024 को बेंगलुरु एयरपोर्ट पहुंची थी, जहां से उन्हें रोक लिया गया और वापस भेज दिया गया। ब्रिटेन वापस भेजने के पहले निताशा कौल को 24 घंटे की हिरासत में भी रखा गया था। निताशा कर्नाटक सरकार के आमंत्रण पर (invitation of the Karnataka government) कांस्टीट्यूशन एंड नेशनल यूनिटी नामक विषय पर बोलने के लिए बेंगलुरु पहुंची थी। उनके पास ब्रिटेन का वैध पासपोर्ट भी था। मई 2025 में केंद्र सरकार ने निताशा कौल का ओसीआई दर्ज खत्म कर दिया था। निरस्त करने के आदेश में निताशा कौल पर भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। आदेश में कहा गया था कि निताशा के लेख और भाषण भारत की संप्रभुता को चोट पहुंचाते हैं।
निताशा कौल यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिंस्टर में अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की प्रोफेसर (Nitasha Kaul is a professor of international relations at the University of Westminster) हैं। कश्मीरी पंडित निताशा कौल ने इकोनोमिक्स की अपनी पढ़ाई दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से की है। उन्होंने इकोनोमिक्स और फिलॉसफी में ब्रिटेन से पीएचडी की है। निताशा ने कश्मीर, राष्ट्रवाद और हिन्दूत्व पर लेख लिखे हैं। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद निताशा कौल के विदेश मामलों की अमेरिकी संसदीय कमेटी के समक्ष अपने बयान दर्ज किए गए थे। इस कमेटी ने कश्मीर में मानवाधिकार के मामले पर निताशा के बयान दर्ज किए थे।


