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Gandhinagar : ‘हील इन इंडिया-हील बाय इंडिया’ पॉलिसी से आयुष सेवाओं का होगा वैश्विक आदान-प्रदान : मुख्यमंत्री

डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन

गांधीनगर : मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर कहा कि जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के डर से जूझ रही थी, तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आयुष-आयुर्वेद क्षेत्र को विकसित कर आयुर्वेदिक काढ़ा, दवाइयों और अन्य उत्पादनों से लोगों की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना के बाद दुनिया भर में आयुर्वेदिक दवाइयों और उत्पादनों की मांग बढ़ गई है और पारंपरिक चिकित्सा की सदियों पुरानी भारतीय पद्धतियां आज स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए पथप्रदर्शक बन गई है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री पटेल ने कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी ही थे, जिनकी प्रेरणा से गुजरात में विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा के ग्लोबल सेंटर की स्थापना के लिए जामनगर को चुना गया है। मुख्यमंत्री ने इस बात का विशेष रूप से उल्लेख किया कि जामनगर में इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (ITRA) के कार्यरत होने से गुजरात का गौरव बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि विश्व स्तरीय स्वास्थ्य देखभाल संस्थान के रूप में अग्रणी इस ITRA संस्थान में 14 विभाग तथा राष्ट्रीय परीक्षण और शोधन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) से मान्यता प्राप्त 6 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री ने आयुर्वेद चिकित्सा और उत्पादनों को जो महत्व दिया है, उसके परिणामस्वरूप आयुष मंत्रालय प्रति वर्ष धन्वंतरि जयंती को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता है। उन्होंने आयुष क्षेत्र में निवेश और नवाचार की असीमित संभावनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि पोषक तत्व हों, दवाइयों की आपूर्ति शृंखला का प्रबंधन हो या आयुष आधारित नैदानिक उपकरण हों या फिर टेलिमेडिसिन हो, इन सभी क्षेत्रों में नवाचार और निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं।

मुख्यमंत्री ने यह कहा कि प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और योग को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए ‘आयुष वीजा’ और ‘आयुष मार्क’ को जारी करने की घोषणा की है। उन्होंने यह विश्वास जताया कि ‘हील इन इंडिया-हील बाय इंडिया’ पॉलिसी के अंतर्गत आने वाले वर्षों में आयुष सेवाओं का विकासशील देशों के साथ आदान-प्रदान भी होगा।

भारत की अध्यक्षता में आयोजित हो रहे G-20 शिखर सम्मेलन के अंतर्गत स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के हिस्से के रूप में पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के विषय में WHO का यह पहला सम्मेलन गांधीनगर में 17 से 19 अगस्त के दौरान आयोजित हो रहा है। ‘सभी के लिए स्वास्थ्य और कल्याण की दिशा में’ की थीम के साथ आयोजित इस शिखर सम्मेलन में स्वास्थ्य के समक्ष खड़ी चुनौतियों का समाधान करने और वैश्विक स्वास्थ्य एवं सतत विकास में प्रगति को तेजी देने के लिए इस पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा की भूमिका पर सामूहिक विचार मंथन किया जाएगा। पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन का आयोजन गुरुवार को गांधीनगर में विश्व स्वास्थ्य संगठन के महासचिव डॉ टेड्रोस अदनोम घेब्रेयेसस, देश के स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री डॉ महेन्द्र मुंजपरा, भूटान की स्वास्थ्य मंत्री लोनपो दाशो डेचेन वांग्मो, गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेशभाई पटेल, डब्ल्यूएचओ के क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल, डॉ विवियन तातियाना और डॉ हंस क्लुगे की उपस्थिति में हुआ।

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