गुवाहाटी : सेवक-रंगपो नई रेल लिंक रेलवे परियोजना पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में से एक है। भारतीय रेल की राजधानी कनेक्टिविटी परियोजनाओं के तहत पूर्वोत्तर क्षेत्र के सभी राज्यों की राजधानियों को जोड़ने के लिए नई रेलवे लाइनों का निर्माण चल रहा है। अन्य कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सिक्किम और देश के बाकी हिस्सों के बीच रेल संपर्क स्थापित करने के लिए सेवक-रंगपो नई रेल लिंक रेलवे परियोजना का कार्य भी तेजी से चल रहा है। सेवक-रंगपो परियोजना ने अब तक 55 प्रतिशत भौतिक प्रगति हासिल की है।
पूर्वोत्तर सीमा रेल (पूसीरे) के सीपीआरओ सब्यसाची डे ने शुक्रवार को बताया है कि सेवक-रंगपो रेल लाइन परियोजना की कुल लंबाई 44.96 किमी (पश्चिम बंगाल में 41.55 किमी और सिक्किम में 3.41 किमी) है। 44.96 किमी की कुल लंबाई में 38.623 किमी (86 प्रतिशत) सुरंगों में, 2.24 किमी (5 प्रतिशत) ब्रिजों में और 4.79 किमी (9 प्रतिशत) स्टेशन यार्ड के ओपेन कटिंग/फिलिंग में है। सुरंग निर्माण कार्यों के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) को अपनाया गया है। 30.11 किमी सुरंग खनन का कार्य और 4.2 किमी सुरंग लाइनिंग का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है। प्रस्तावित लाइन में 14 सुरंगें हैं, इनमें सबसे लंबी सुरंग 5.30 किमी और सबसे छोटी सुरंग 538 मीटर लंबी है। परियोजना में 13 बड़े ब्रिज और 10 छोटे ब्रिज हैं। सभी प्रमुख ब्रिजों का कार्य चल रहा है तथा 06 छोटे ब्रिजों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। इस परियोजना में पांच स्टेशनों- सेवक, रियांग, मेल्ली, रंगपो और एक भूमिगत हॉल्ट स्टेशन अर्थात तीस्ता बाजार का निर्माण भी शामिल है।
परियोजना की अनुमानित लागत 12,474 करोड़ रुपये है। वर्तमान में इस परियोजना पर सुरंगों, पुलों और स्टेशनों के निर्माण से संबंधित सभी गतिविधियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं तथा दिसंबर, 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य है। यह भारत में चल रही प्रतिष्ठित राष्ट्रीय परियोजनाओं में से एक है और इस परियोजना के पूरा होने पर, पहली बार सिक्किम राज्य रेलवे से जुड़ेगा। इस परियोजना के पूरा होने पर सिक्किम में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। सिक्किम से देश के विभिन्न हिस्सों तक लंबी दूरी की ट्रेन सेवाएं शुरू कर पाना भी संभव होगा। राज्य के पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी काफी बढ़ावा मिलेगा।


