लखनऊ के उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की वाल्मीकि रंगशाला में मंचित हुए लघु नाटक
लखनऊ : छोटे-छोटे बच्चों ने अपनी अभिनय प्रतिभा से दर्शकों का मन मोह लिया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की रसमंच योजना के अंतर्गत शनिवार को मदर सेवा संस्थान ने चबूतरा थियेटर फेस्टिवल सीजन -आठ के अंतर्गत दो नाटकाें की प्रस्तुति दी। यह प्रस्तुति 30 दिवसीय बाल नाट्य कार्यशाला में तैयार की गई है। वरिष्ठ रंगकर्मी सुशील कुमार सिंह की दो बाल रचना ’आज स्कूल नहीं जाऊंगा’ और ’ठग ठगे गये’ का सशक्त प्रस्तुतिकरण हुआ। उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की वाल्मीकि रंगशाला में मंचित नाटकों का निर्देशन फिल्म अभिनेता व रंगकर्मी महेश चंद्र देवा ने किया।
पहले नाटक में दिखाया गया कि सुबह के आठ बज गए हैं। बेबी स्कूल जाने को तैयार है लेकिन पप्पू का मूड नहीं है। बेबी उसे कई तरह से समझाने की कोशिश करती है पर वह एक ही रट लगाये हैं ’आज स्कूल नहीं जाऊंगा’…और फिर मम्मी की एन्ट्री होती है। पहले प्यार से फिर धमाधम। पापा लाख बचाने की कोशिश करते हैं पर मम्मी चन्डी बनी हैं लेकिन नतीजा वही आज स्कूल नहीं जाऊंगा।
थक-हार कर मम्मी एक ऐसा दांव चलती हैं कि फिर पप्पू सीधे बस्ता उठा स्कूल का ही रुख़ करते हैं और भूल जाते हैं हमेशा के लिये ये कहना कि आज स्कूल नहीं जाऊंगा। दूसरे संगीतमय नाटक में धूर्त और मक्कार ठग आये दिन सीधे-सरल, भोले-भाले आम जनों को तरह-तरह के अंधविश्वासों, पाप-पुण्य, स्वर्ग- नर्क के चक्करों में उलझा कर उन्हे लूटते हैं, अपना उल्लू सीधा कर ते हैं।
मोहम्मद अमन और घन्टोले नाम के दो धूर्त ठग जो गुरू-चेले हैं, भी जंगल में एक कुएं के पास अपना अड्डा जमाएं हुए है। वह हर आने-जाने वाले राहगीर को तरह-तरह के हथकंडे अपना कर ठगा करते थे। किसी को ज्योतिषी बन राहू-केतु जैसे गृहों का भय दिखा कर और किसी को कुएं के देव के प्रकोप से डरा कर उनका धन, गहने, जेवर आदि लूट लिया करते थे।
एक दिन एक बुद्धिमान बहू ने इन ठगों की करतूतों को भांप कर इन्हीं के टोटकों को अपना कर न केवल अपनी सास, पति और खुद, को लुटने से बचाया बल्कि अन्य मुसाफ़िरों को भी इनके चंगुल में फंसने से बचाया।
मंच परे कलाकार में संचालन राजेंद्र विश्वकर्मा, संगीत परिकल्पना एवं नक्कारा पर सुनील विश्वकर्मा, हारमोनियम, आर्गन पर पवन सिंह राजपूत, वेशभूषा रमेश सैनी, प्रकाश परिकल्पना तमाल बोस की थी।
मंच निर्माण दिनेश चंद्र, प्रस्तुति नियंत्रक किरन लता, रूपसज्जा सहीर की रही, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी अजय कुमार और विनय तोमर की रही।


