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THANE : रिक्शा चालकों की उद्दंडता रोकने ठाणे शहर में चाहिए स्वतंत्र यंत्रणा

रिक्शा चालकों की उद्दंडता के कारण छात्रा को गंवानी पड़ी थी अपनी जान

ठाणे : ठाणे शहर में रिक्शा चालकों की उद्दंडता और बर्बरता किसी से छिपी नहीं रही है । इन बातों का जिक्र करते हुए ठाणे कांग्रेस के महासचिव और प्रवक्ता सचिन शिंदे ने राज्य सरकार से मांग की है कि ठाणे शहर के उदंड रिक्शा चालकों पर नियंत्रण रखने के लिए यहां स्वतंत्र प्रशासनिक यंत्रणा स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके। उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि कुछ वर्ष पहले ही रिक्शा चालकों की उद्दंडता के कारण स्वप्नाली लाड नामक इंजीनियरिंग की छात्रा को अपनी जान गंवानी पड़ी थी । रिक्शा चालक ने लाड के साथ उद्दंडता करने की कोशिश की थी। जिस कारण लारड को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

रिक्शाचालकों के सहयोग के कारण भागने में सफल रहा
विदित हो कि गत दिनों ठाणे रेलवे स्टेशन से जिला परिषद रोड पर एक रिक्शा चालक ने युवती के साथ अश्लील हरकत ही नहीं की बल्कि अपने रिक्शा से घसीटते हुए युवती को 100 मीटर दूर ले गया । इस रिक्शा चालक ने युवती को अश्लील इशारे किए थे। लेकिन आरोपी रिक्शाचालक अन्य रिक्शाचालकों के सहयोग के कारण भागने में सफल रहा था। लेकिन इस दौरान पीड़ित युवती को गहरी चोटें भी आई थी। आखिरकार इस मामले में राज्य सरकार के निर्देश पर ही आरोपी रिक्शा चालक की गिरफ्तारी की गई। इन बातों का जिक्र कांग्रेस महासचिव सचिन शिंदे ने महाराष्ट्र सरकार को लिखे निवेदन में किया है। उन्होंने मांग की है कि शहरी भागों में उदंड रिक्शा चालकों पर शिकंजा कसने के लिए स्वतंत्र यंत्रणा की जरूरत है । ऐसी यंत्रणा को अब तक साकार नहीं किया गया है। जिस कारण ऐसी समस्याएं बार-बार सामने आ रही है । उन्होंने यह भी मांग की है कि दूसरे राज्यों के लोगों को रिक्शा चलाने का जो परमिट दिया जाता है, उस बाबत भी कुछ विशेष शर्ते होनी चाहिए । ताकि ऐसे रिक्शा चालक कोई अपराधिक या हिंसक वारदात महिलाओं व युवतियों के साथ नहीं कर पाए।

ठाणे शहर में रिक्शा चालकों की चलती है मनमानी
राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को लिखे पत्र में सचिन शिंदे ने मांग की है कि ठाणे शहर में रिक्शा चालकों की मनमानी चलती है। किराया नकारने के साथ ही यात्रियों को दादागिरी दिखाते हैं। यहां तक कि कभी-कभी यात्रियों के साथ मारपीट किए जाने की भी शिकायतें मिलती रहती है। यात्रियों के लिए चिंता का विषय रहता है कि वह इस मामले को लेकर किसके पास जाएं। पुलिस, यातायात पुलिस के पास जाएं या फिर आरटीओ के पास जाएं। इसी संभ्रम में वे फंस जाते हैं। ऐसी स्थिति में चाहिए कि मुंहजोर रिक्शा चालकों से निपटने के लिए स्वतंत्र पुलिस प्रशासनिक यंत्रणा को सक्रिय किया जाए । अन्यथा आगे भी इसी तरह की हिंसक वारदातें शहर के रिक्शा चालक कर सकते हैं। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

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