
आयरलैंड के जाने-माने उपन्यासकार जेम्स जॉयस और नोरा बार्नेकल की पहली मुलाकात 1904 में हुई और वे बहुत तेजी से एक-दूसरे की तरफ खिंचे। कहते हैं कि जब जेम्स ने नोरा को पहली बार अपने पिता से मिलवाया, तो उसका कुछ मुश्किल-सा सरनेम ‘बार्नेकल’ सुनकर उसने टिप्पणी की, ‘क्या इसकी बजाय ‘नोरा जॉयस’ ज्यादा खूबसूरत नहीं लगता?” और फिर अपने बेटे के कान में कहा, ‘इससे शादी करोगे तो यह तुम्हें कभी नहीं छोड़ेगी- तुम्हारी वजह से नहीं, तुम्हारे सरनेम की वजह से।’ 1905 में जेम्स और नोरा साथ-साथ रहने लगे और फिर जल्दी ही उन्होंने विवाह भी कर लिया।
मैंने अपने आपको भिखारी बना लिया
माय डियर नोरा, 29 अगस्त, 1904
मैंने अभी-अभी अपना मिडनाइट डिनर ख़त्म किया है, जिसके लिए मुझे कतई भूख नहीं थी। मैं अभी भोजन के आधे हिस्से में ही था कि मुझे एहसास हुआ कि मैं अपनी अंगुलियां चाट रहा हूं। बस उसके बाद मुझसे खाया नहीं गया। मैं बहुत दुखी महसूस कर रहा हूं। इस नामुराद कलम और इस कमबख्त कागज को क्षमा कर देना।
हो सकता है आज रात की मेरी बातों ने तुम्हें तकलीफ पहुंचाई हो, लेकिन अपना मस्तिष्क तुम्हारे सामने खोल देना ठीक ही था। मेरा मस्तिष्क आज की इस सामाजिक व्यवस्था को और ईसाईवाद को घर, तथाकथित सद् आचरण, वर्ग-प्रणाली और धार्मिक सिद्धांतों को अस्वीकार करता है। मैं एक घर के विचार को किस तरह पसंद कर सकता हूं? मेरा घर एक सामान्य-सा मध्यवर्गीय घर था, खर्चीली आदतों से अस्त-व्यस्त और यही मुझे विरासत में मिला है। मेरी मां की आहिस्ता-आहिस्ता हत्या की गई, मेरे खयाल से मेरे पिता के दुर्व्यवहार द्वारा, बरसों की तकलीफों द्वारा और मेरे आचरण की उपेक्षापूर्ण बेबाकी द्वारा। जब मृत्यु के बाद मैंने ताबूत में पड़ा उसका चेहरा देखा, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं एक सताए गए इंसान का चेहरा देख रहा हूं। मैंने उस व्यवस्था को कोसा, जिसने उसे अपना शिकार बनाया था। परिवार में हम कुल सत्रह लोग थे। मेरे भाइयों और बहनों का मेरे लिए कोई अर्थ नहीं है। सिर्फ एक भाई है, जो मुझे समझने की क्षमता रखता है। छह साल पहले मैंने कैथोलिक चर्च छोड़ दिया, इससे बेहद नफरत करते हुए।
अपनी प्रकृति के आवेगों को देखते हुए मेरे लिए इसका हिस्सा बने रहना असंभव हो गया। एक छात्र के रूप में मैंने इसके खिलाफ एक गुप्त लड़ाई लड़ी और इसके द्वारा प्रस्तावित पदों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। ऐसा करके मैंने अपने आपको एक भिखारी बना लिया, लेकिन मैं अपना गर्व बचा पाने में सफल रहा। अब मैं लिखकर और बोलकर इसके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखे हूं। मैं सामाजिक व्यवस्था में एक ‘आवारा’ के अलावा किसी और रूप में जगह नहीं पा सकता। मैंने तीन बार डॉक्टरी पढ़ने की कोशिश की, एक बार कानून और एक बार संगीत। पिछले हफ्ते मैं एक टूरिंग अभिनेता के तौर पर काम पाने की कोशिश कर रहा था। इस योजना पर मैं पूरी ऊर्जा से काम नहीं कर सका, क्योंकि तुम मुझे बांह पकड़कर खींचती रहीं। मेरी जिंदगी की असली मुश्किलें बहुत अविश्वसनीय हैं, पर मैं उनसे नफरत करता हूं। आज तुम्हारे जाने के बाद मैं देर तक ग्राफन स्ट्रीट पर भटकता रहा और एक खंभे के सहारे खड़ा देर तक सिगरेट पीता रहा। सड़कें जिंदगी की उस रौनक से भरपूर थीं, जिसे मैं बचपन से देखता आया हूं। मुझे अपनी वे पंक्तियां याद आने लगीं, जो मैंने कुछ वर्ष पहले पेरिस में अपने आवास के दौरान लिखीं थीं – ‘कितने ही जोड़े, कितनी ही तिकड़ियां बाजार की रौनक में शामिल है..। जैसे जिंदगी उनके लिए एक फुरसत भरा जश्न हो…’
जाज


