spot_img

motivation story : साधना

महर्षि दयानंद सहज जीवन जीने वाले एक साधक संन्यासी थे। जैसे सुख दुख, राग-द्वेष आदि का उन पर कोई असर नहीं होता था, वैसे ही अच्छे-बुरे मौसम से भी वे अप्रभावित थे।

एक बार माघ की कंपा देने वाली सर्दी में वे बर्फ सी ठंडी रेत पर प्राणायाम मुद्रा में केवल एक कोपीन बांधे बैठे थे। वहीं पास से एक अंग्रेज जिलाधीश टहलते हुए गुजरे। वे स्वामी जी को इस तरह बैठे देखकर दंग रह गए। जिलाधीश ने उन्हें नमस्कार कर पूछाः महात्मा जी! इस बर्फ सी रेती में केवल कोपीन बांधे कैसे बैठे हैं? क्या आपको सर्दी नहीं लगती?

दयानंद ने कहाः महाशय, जैसे आप का चेहरा सर्दी, गर्मी, बरसात सब सहने में सक्षम है, ठीक उसी प्रकार प्राणायाम द्वारा मैंने अपने सम्पूर्ण शरीर को सुदृढ़ एवं सक्षम बना लिया है। इसलिए प्रतिकूल मौसम का मुझ पर कोई असर नहीं होता। उन्होंने कहा मनुष्य का शरीर और आत्मा वह सब सहने को सक्षम हो जाती है, जो वह चाहता है। मनुष्य जिसके लिए भी प्रयास करता है, वह उसे प्राप्त हो ही जाती है।

अंग्रेज जिलाधीश महर्षि दयानंद के इस उत्तर पर आश्चर्यचकित होकर उन्हें देखते रह गए। श्रद्धा से नतमस्तक होकर उन्होंने महर्षि को प्रणाम किया और विदा ली।

Nagpur : बेटी होने पर दिया तीन तलाक, पति और सास के खिलाफ मामला दर्ज

नागपुर : (Nagpur) नागपुर में एक मुस्लिम महिला (Nagpur, a Muslim woman) ने अपने पति और सास के खिलाफ पत्नी से मारपीट करने और...

Explore our articles