उत्तरकाशी : जिले में लाल धान के बाद काले गेहूं की खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने की जिलाधिकारी अभिषेक रुहेला ने कवायद शुरू करवा दी है। देश में किसान काले गेहूं की खेती से लाखों रुपये कमा रहे हैं।
मंगलवार को जिलाधिकारी अभिषेक रुहेला ने डुण्डा ब्लॉक के गेंवला (बरसाली) गांव जाकर इस नई मुहिम से जुड़ने के लिए किसानों को प्रेरित किया और काले गेहूं के बीज वितरित किए। गेंवला गांव में काले गेहूं की खेती के लिए 15 किसानों का सहयोग लिया जा रहा है। इसके साथ ही नौगांव ब्लॉक में भी किसानों को इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि काले गेहूं की खेती का चलन हाल के कुछ सालों से ही देश के कुछ चुनिंदा हिस्सों में शुरू हुआ है। नेशनल एग्री फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (नाबी) मोहाली को देश में काले गेहूं को विकसित करने का श्रेय जाता है। नॉन जीएम फसल के तौर पर विकसित काले गेहूं में एन्थ्रोसाईनिन नामक एंटीऑक्सीडेंट तत्व काफी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही इसमें महत्वपूर्ण पोषक तत्वों के साथ ही फाइबर की प्रचुरता होने और कार्बोहाइड्रेट व ग्लूटेन की संतुलित मात्रा के चलते यह आम गेहूं की तुलना में स्वास्थ्य के लिए काफी गुणकारी माना जाता है। सामान्य गेहूं से तिगुनी से भी अधिक कीमत में बिकने वाले वाले काले गेहूं की बाजार में मांग दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।
जिले के चिन्यालीसौड़ ब्लॉक के कामदा गांव के प्रगतिशील किसान जय सिंह बिष्ट काले गेहूं उगाने का सफल प्रयोग कर चुके हैं। इस सफलता से जिले में काले गेहूं की खेती की बेहतर संभावना दिखी तो प्रशासन ने इसे बढ़ावा देने के लिए जिले के डुण्डा व नौगांव ब्लॉक के कुछ गांवों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की कवायद शुरू कर दी है।
इस मुहिम के तहत जिलाधिकारी अभिषेक रुहेला ने मुख्य कृषि अधिकारी जे.पी. तिवारी के साथ गेंवला गांव जाकर किसानों एवं महिला समूहों से इस संभावनाशील खेती को प्रयोग के तौर पर अपनाने का आग्रह किया। इसके लिए कृषि विभाग किसानों को पूरा सहयोग करेगा और उत्पादित गेहूं की खरीद की जिम्मेदारी भी लेगा। यह प्रयोग सफल रहने पर अगले दौर में इसे ज्यादा विस्तार देने पर विचार किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने किसानों को जैविक एवं पारंपरिक अन्न की खेती के गुणकारी पहलुओं की जानकारी देते हुए इसे लाभकारी बनाए जाने के उपायों पर भी ग्रामीणों से चर्चा की। उन्होंने कहा कि हम खेती के तौर-तरीकों में अनुकूल बदलाव के लिए हमेशा तैयार रहें।
इस मौके पर मुख्य कृषि अधिकारी जेपी तिवारी ने किसानों को काले गेहूं की खेती एवं इससे जुड़ी संभावनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि फसल प्रणाली में बदलाव लाकर किसानों की आमदनी को बढ़ाने के लिए इस तरह के अभिनव प्रयासों को कामयाब बनाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लिहाजा विभाग उन्हें पूरा प्रोत्साहन देगा।
काले गेहूं की खेती के लाभ
काले गेहूं की खेती से हो रहे लाभ की वजह से किसानों की रूचि इस तरह के गेहूं के उत्पादन में हो रही है। काले गेहूं का बाजार में भाव सामान्य गेहूं के मुकाबले अधिक मिलता है। मंडी में जहां सामान्य गेहूं का भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल है, वहीं काले गेहूं भाव 6000 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल जाता है। इससे किसानों को करीब तीन गुना मुनाफा मिलता है। यही कारण है कि किसानों की रूचि काले गेहूं की खेती की ओर बढ़ रही है।
काले गेहूं की खेती का सही समय
काला गेहूं, सामान्य गेहूं की ही एक प्रजाति है जिसकी खेती सामान्य गेहूं की तरह ही की जाती है। काला गेहूं की खासियत के कारण ही इसका मूल्य अधिक है। सामान्यत: गेहूं की खेती मध्य अक्टूबर से लेकर नवंबर तक की जाती है। लेकिन काले गेहूं की खेती का सही समय नवंबर माना जाता है। नवंबर के बाद यदि आप काले गेहूं की बुवाई करते हैं तो आपको उपज कम प्राप्त होगी।
काले गेहूं की खेती के लिए भूमि
काले गेहूं की खेती के लिए दोमट भूमि सबसे अच्छी मानी जाती है। इसके अलावा इसकी खेती बलुई दोमट, भारी दोमट, मटियार तथा मार एवं कावर भूमि में की जा सकती है। यदि किसान के पास सिंचाई के पर्याप्त साधन है तो इसकी खेती सभी प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है।


