कोर्ट ने याची को यूपीएसआरटीसी को तीन माह में ब्याज सहित पांच लाख दावा प्रतिपूर्ति देने का दिया आदेश
प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुर्घटना में हुई मौत के मामले में कहा कि मुआवजे का लाभ देने से इंकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने मामले में सुप्रीम कोर्ट के राममूर्ति मामले में पारित आदेश का हवाला देते हुए पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
कहा कि याची को वाद की दाखिला के साथ ही मुआवजे की रकम पर सात फीसदी की दर से ब्याज भी दिया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने गिरिजा कटियार व अन्य की याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) को निर्देश दिया है कि वह याची को मुआवजे की रकम तीन महीने में भुगतान करे।
मामले में रूप नारायण कटियार बस चालक था। वह कानपुर से दिल्ली के बीच जाने वाली बस संख्या यूपी 78-3901 का संचालन करता था। 16 जनवरी 1998 को वह दिल्ली जा रहा था। तभी एटा के मलावन स्थान में दूसरी तरफ से आ रही बस संख्या यूपी 93-575 की भिड़ंत हो गई। जिसमें उसकी मौत हो गई। चालक के करीबियों ने टिब्यूनल के समक्ष मुआवजे की मांग की लेकिन टिब्यूनल ने इस भिड़ंत के लिए चालक को जिम्मेदार पाते हुए वाद का खारिज कर दिया। याचियों ने उसे हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी।
याचियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा राममूर्ति के केस में पारित आदेश का हवाला दिया। कहा कि घटना के समय मृत्यु के मुआवजे की रकम पचास हजार रुपये थी। इसे बढ़ाकर अब पांच लाख रुपये कर दिया गया है। चूंकि मोटर वाहन अधिनियम लाभकारी कानून है, इसलिए वह मोटर वाहन अधिनियम में किए गए संशोधन के लाभ का हकदार हैं। कोर्ट ने इन तथ्यों को देखते हुए याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर सात फीसदी ब्याज के साथ पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश पारित किया।


