
विधायक विलास तरे ने जेएनपीए प्रबंधन को लिखा पत्र
रोजगार और ठेकों में स्थानीय नागरिकों को अवसर देने पर जोर
पालघर : (Palghar) बोईसर विधानसभा क्षेत्र (Boisar Assembly Constituency) के विधायक विलास तरे (Vilas Tare) ने प्रस्तावित वाधवन बंदरगाह परियोजना के अंतर्गत होने वाले लघु एवं सहायक कार्यों में स्थानीय भूमिपुत्रों, आदिवासी समुदायों तथा परियोजना प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने जेएनपीए (JNPA) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक गोवर्धन दयाल को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा जताई है।
परियोजना से प्रभावित होंगे कई गांव
पत्र में विधायक तरे ने कहा है कि वाधवन बंदरगाह परियोजना (Wadhwan Port Project) देश की एक महत्वाकांक्षी और विकासोन्मुख परियोजना है, जिसका बड़ा हिस्सा बोईसर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। परियोजना के कारण क्षेत्र के अनेक गांवों के स्थानीय नागरिकों, आदिवासी समुदाय, मछुआरा समाज तथा अन्य प्रभावित परिवारों पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।
निर्माण कार्यों में रोजगार के बड़े अवसर
विधायक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि परियोजना के निर्माण और भविष्य के संचालन के दौरान परिवहन, सुरक्षा, स्वच्छता, रखरखाव, कार्यालयीन सहायता, छोटे निर्माण कार्य, सामग्री आपूर्ति, मशीनरी सहायता, भोजन व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स जैसी सेवाओं में बड़े पैमाने पर रोजगार एवं व्यावसायिक अवसर उपलब्ध होंगे।
उन्होंने मांग की कि इन सभी कार्यों में स्थानीय युवाओं, आदिवासी युवक-युवतियों, बेरोजगारों और परियोजना प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर शामिल किया जाए।
स्थानीय नागरिकों के योगदान का मिले लाभ
विलास तरे ने कहा कि क्षेत्र के नागरिकों ने परियोजना के प्रति सकारात्मक और सहयोगात्मक भूमिका निभाई है। ऐसे में परियोजना से उत्पन्न होने वाले रोजगार और व्यापारिक अवसरों का पहला लाभ स्थानीय लोगों को मिलना चाहिए। उन्होंने जेएनपीए से अनुरोध किया कि सभी संबंधित विभागों, ठेकेदार संस्थाओं और एजेंसियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता देने की नीति लागू की जाए।
न्यायसंगत निर्णय की अपेक्षा
पत्र के अंत में विधायक ने जेएनपीए प्रबंधन (JNPA management) से स्थानीय नागरिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने तथा आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि इससे विकास परियोजना और स्थानीय समाज के बीच विश्वास और सहभागिता को मजबूती मिलेगी।


