NAVI MUMBAI : भारतीय व्यापारियों ने की जीएसटी के सरलीकरण की मांग, प्रतिस्पर्धा के लिए बने समान नीतियां

नवी मुंबई : भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने केंद्र सरकार से जीएसटी कानून के सरलीकरण की मांग की है। व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी कानून आने के बाद से अब तक उसमें सैकड़ों बदलाव किए जा चुके हैं। उसके बावजूद कानून इतना विस्तारित है कि आम आदमी की बात छोड़ो वकीलों को भी वह समझ में नहीं आ रहा है। इसलिए सरकार उसका सरलीकरण करके इस तरह से प्रस्तुत करे, जो की देश के छोटे से छोटे व्यापारी की समझ में आ सके। उद्योगपति मोहन गुरुनानी ने कहा कि जब केंद्र सरकार जीएसटी कानून लेकर आई थी उस वक्त उसने संभावना जताई थी कि उसे 1 लाख करोड़ से कम कर प्राप्त होगा । हालांकि अब उसे जीएसटी के माध्यम से उसकी संभावना से कहीं अधिक कर मिल रहा है। उसके बावजूद सरकार लगातार जीवनावश्यक वस्तुओं को कर के दायरे में लाकर जनता को महंगाई की गर्त में धकेल रही है। इसलिए सरकार से हमारी मांग है कि वह सभी खाद्य वस्तुओं को कर के दायरे से बाहर करे और जनता को बढ़ती महंगाई से राहत दे। इसी के साथ सरकार जीएसटी की चार दरों की जगह सिर दो दरें ही रखे।

एपीएमसी ऐक्ट में हो सुधार

व्यापारियों ने कहा कि जिस वक्त एपीएमसी कानून लाया गया था, तब राज्यों को उसे लागू करने की अनुमति दी गई थी, जिसके चलते सभी राज्यों में अलग – अलग नियम लागू हैं। आज किसान सीधे बाजार में अपने उत्पाद को लेकर नहीं आता है बल्कि वह स्थानीय व्यापारी को पहले अनाज बेंचता है और बाद में वह स्थानीय व्यापारी एपीएमसी में लाकर अनाज बेंचता है। इस तरह जो भी फायदा होता है वह व्यापारी को होता है किसानों को नहीं। इसलिए अगर व्यापारियों को सीधे किसानों से खरीदने की अनुमति दे दी जाए तो किसानों, व्यापारियों और आम जनता सबका फायदा होगा।

ऑनलाइन मंच व्यापारियों को पहुंचा रहे ठेस

व्यापारी मंडल के महामंत्री मुकुंद मिश्रा ने कहा कि आज विदेशों से कई कंपनियां सिर्फ यह टारगेट लेकर आ रही हैं कि उन्हे अगले 5 वर्षों तक यहां 500 सौ करोड़ का नुकसान उठाना है। यदि वो लोग नुकसान उठाकर सामान बेंचेंगे तो आनेवाले समय में उसकी भरपाई भी करेंगे। ऐसे लोगों से फिलहाल इस देश का मध्यम वर्गीय व्यापारी किस प्रतियोगिता करेगा। सरकार को चाहिए कि देश के व्यापारियों को सही प्रतियोगिता के लिए माहौल बनाए जिससे देश के व्यापारी भी जीवित रह सकें और विदेशी निवेश भी आ सके।

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