
मुंबई : (Mumbai) जोगेश्वरी (ईस्ट) के पूनम नगर (Poonam Nagar, Jogeshwari (East)) स्थित एपीएमजीपी कॉलोनी (APMGP Colony) के निवासियों के लिए 15 साल का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ है। म्हाडा (MHADA) ने इस महत्वाकांक्षी पुनर्विकास परियोजना को रफ्तार देते हुए निवासियों के साथ परमानेंट अल्टरनेट अकोमोडेशन एग्रीमेंट (Alternate Accommodation Agreements) की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
15 साल का इंतजार और म्हाडा की पहल
1990 के दशक में बनी एपीएमजीपी कॉलोनी की 17 इमारतें (4 मंजिला) अत्यंत जर्जर और खतरनाक स्थिति में थीं। निजी डेवलपर्स से अपेक्षित रिस्पॉन्स न मिलने के बाद, निवासियों की मांग पर म्हाडा ने इस प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लिया। इसे EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) (EPC (Engineering, Procurement, and Construction)) मोड के जरिए लागू किया जा रहा है, जिसमें मेसर्स बी.जी. शिर्के कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी को ठेकेदार नियुक्त किया गया है।
छोटे घर, बड़ी सुविधाएं
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मौजूदा 180 वर्ग फुट के छोटे फ्लैट्स के बदले निवासियों को 450 वर्ग फुट के आधुनिक और फर्निश्ड फ्लैट्स मिलेंगे। 7 एकड़ में फैली इस कॉलोनी का कुल निर्माण क्षेत्र 1,21,889 वर्ग मीटर होगा, जिसमें रिहैबिलिटेशन और सेल्स कंपोनेंट दोनों शामिल हैं।
893 करोड़ का निवेश
इस पुनर्विकास परियोजना में कुल ₹893 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। निर्माण अवधि के दौरान निवासियों को आर्थिक परेशानी न हो, इसके लिए म्हाडा ₹20,000 प्रति माह किराया दे रहा है। इसके अलावा, 3 साल का एडवांस किराया, ब्रोकरेज और रिलोकेशन खर्च (₹20,000) भी दिया जा रहा है।
पीएएए एग्रीमेंट की शुरुआत
बांद्रा स्थित म्हाडा मुख्यालय में वाइस चेयरमैन और सीईओ संजीव जायसवाल की उपस्थिति में पहले कुछ फ्लैट धारकों के साथ ‘परमानेंट अल्टरनेट अकोमोडेशन एग्रीमेंट’ (‘Permanent Alternate Accommodation Agreement’) साइन किया गया। यह एग्रीमेंट निवासियों को उनके नए घर का कानूनी अधिकार सुनिश्चित करता है। सीईओ संजीव जायसवाल (CEO Sanjeev Jaiswal) ने निवासियों से अपील की है कि वे सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जल्द से जल्द एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करें और खतरनाक इमारतों को खाली करें। यह प्रोजेक्ट DCPR 2034 के रेगुलेशन 33(5) (under Regulation 33(5) of the DCPR 2034) के तहत विकसित किया जा रहा है, जो पश्चिमी उपनगरों में हाउसिंग का एक नया मॉडल पेश करेगा।


