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motivation story : सत्यनिष्ठ वकील

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जालंधर में एक वकील थे– मुंशीराम। वे झूठे मुकदमे नहीं लेते थे। एक बार, जब कचहरी में पेशी समय उन्हें अपने मुकदमे के झूठा होने की बात मालूम हुई, तो उन्होंने वहीं उस मुकदमे को छोड़ दिया और ली हुई फीस वापस कर दी।

इस घटना से उनकी वकालत को क्षति पहुंची और उनकी आय एक चौथाई रह गई। लोगों को लगा कि अब उनका जीवन नस्ट हो गया। उन्होंने अपनी सत्यनिष्ठा में आकर अपने परिवार को कष्ट में दाल दिया, परन्तु जल्द ही उनकी सत्यनिष्ठा का सिक्का जम गया और उनके पास सच्चे मुकदमे अधिक आने लगे।

न्यायाधीश भी आश्वस्त रहने लगे कि मुंशीराम अगर मुकदमे की वकालत कर रहे हैं, तो जरूर ही सत्य का पक्ष उधर ही होगा। अब उनकी आय पहले से 100 गुना ज्यादा बढ़ गई। बाद में इन्हीं मुंशीराम ने गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की और संन्यास लेने के बाद वे स्वामी श्रद्धानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।