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Kanpur : उर्सला अस्पताल में दिव्यांगों का सर्टिफिकेट बनाने वाले डाक्टर नदारद

कानपुर : दिव्यांगों के प्रति लोगों की अनायास सहानुभूति आ जाती है और सहयोग करते हैं, लेकिन उर्सला अस्पताल में सहानुभूति को तो दरकिनार करते ही है साथ ही जो शासनादेश है उसका भी पालन नहीं करते। इसीलिए दिव्यांगों को सर्टिफिकेट बनवाने के लिए परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सप्ताह में एक दिन अस्पताल में लगने वाले कैंप की जब आज हकीकत देखी गई तो लापरवाही सामने आ गई। कैंप में न तो दिव्यांगों के लिए बैठने की व्यवस्था थी और न ही व्हील चेयर। हद तो तब हो गई जब मुख्य डाक्टर अमित कनौजिया भी नदारद दिखे।

जिला अस्पताल उर्सला में हर सप्ताह गुरुवार के दिन दिव्यांगों का सर्टिफिकेट बनाये जाते हैं और यहां पर सर्टिफिकेट बनवाने के लिए दिव्यांग परेशान होते हैं। दिव्यांगों की परेशानियों को देखते हुए आज हकीकत जानने के लिए मौके का जायजा लिया गया। यहां पर मुख्य डाक्टर के रुप में अमित कनौजिया की ड्यूटी रही और सहायक के रुप में डाक्टर जेपी गुप्ता रहे। पर्चा काटने के लिए वरिष्ठ लिपिक आरके सिंह थे। लिपिक दिव्यांगों को लाइन में खड़ा किये थे और वहां पर दिव्यांगों को बैठने तक की व्यवस्था नहीं की गई थी। इस भीषण उमस भरी गर्मी में दिव्यांग पानी के लिए भी तरसते रहे। इन सबके बावजूद सर्टिफिकेट के लिए दिव्यांग गर्मी सहते रहे, लेकिन मुख्य डाक्टर अमित कनौजिया ही घंटों नदारद रहे, जिससे दिव्यांगों की और परेशानियां बढ़ गईं।

दिव्यांगों के मुताबिक सहायक डाक्टर जेपी गुप्ता बात बात झल्ला उठते थे। जब पूछा गया कि मुख्य डाक्टर अमित कनौजिया क्यों नहीं आये तो कोई संतुष्टजनक जवाब नहीं मिल सका। ग्वालटोली से आये दीपक ने बताया कि शासन का साफ निर्देश है कि कार्यालय में दिव्यांगों को बैठने व पानी की समुचित व्यवस्था की जाये लेकिन यहां पर कोई सुनने वाला नहीं है। एक बार में सर्टिफिकेट नहीं बनता और बार बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।

नवाबगंज से आये रोहित ने बताया कि बहन निशा जन्मजात दिव्यांग है और कई बार सर्टिफिकेट के लिए आये पर कोई न कोई कारण निकाल दिया जाता है। यहां पर व्हील चेयर की भी व्यवस्था नहीं है जिससे मजबूरी में दिव्यांग घसीटकर या परिजनों की सहायता से कार्यालय तक पहुंचते हैं। विकलांग एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब डॉक्टर नदारद हों। हमेशा यहां ऐसा ही नजारा रहता है। वहीं जब इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाक्टर आलोक रंजन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो गलत है। पूरे मामले की जानकारी कर जिम्मेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और दिव्यांगों को हर सुविधा मुहैया कराई जाएगी।

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