Home crime news Gurugram : फर्जी कागजात तैयार कर एनआरआई व्यक्ति की 40 करोड़ की...

Gurugram : फर्जी कागजात तैयार कर एनआरआई व्यक्ति की 40 करोड़ की जमीन की कराई रजिस्ट्री

0
248

-15 कनाल 2 मरला जमीन को 6.6 करोड़ में खरीदने की बात कहकर कराई जीपीए

-पुलिस ने जालसाज गिरोह के 5 सदस्यों समेत 5 को किया गिरफ्तार

-आरोपियों की मदद करने में शामिल पुलिस का एसआई भी गिरफ्तार

गुरुग्राम : गुरुग्राम में एक एनआरआई व्यक्ति की करीब 40 करोड़ रुपये की 15 कनाल 2 मरला जमीन के फर्जी कागजात तैयार करके उसकी रजिस्ट्री कराने का भंडाफोड़ हुआ है। इस मामले में पुलिस के एक एसआई समेत 5 लोगों की गिरफ्तारी की गई है। आरोपियों ने इस 40 करोड़ की जमीन को मात्र 6.6 करोड़ रुपये में खरीदना दिखाकर जीपीए तैयार करवा ली।

जानकारी के अनुसार एक मार्च 2022 को पूर्ण मनचन्दा नाम व्यक्ति ने पुलिस आयुक्त गुरुग्राम को शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने एसपीआर रोड स्थित गांव बेगमपुर खटोला जिला गुरुग्राम में उनकी जमीन के फर्जी कागज तैयार करके उन्हें पंजीकृत कराया है। उनकी करोड़ों की जमीन को हड़प लिया है। इस शिकायत पर गुरुग्राम पुलिस ने जांच की और 16 मार्च 2022 को आरोपियों के खिलाफ थाना बादशाहपुर में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया। वर्तमान पुलिस आयुक्त विकास कुमार अरोड़ा ने इस केस में एक एसआईटी गठित की व एसआईटी को इस केस से संंबंधित दस्तावेज, आरोपियों के बारे में जानकारी एकत्रित करने के दिशा-निर्देश दिए।

एसआईटी ने कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए चार आरोपियों को इस केस में गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों की पहचान सुभाष चंद निवासी गांव टोडापुर हेलीमंडी जिला गुरुग्राम, टोनी निवासी गांव टोडापुर, संजय गोस्वामी रिकॉर्ड कीपर तहसील कालकाजी दिल्ली व गुरुग्राम के सूर्य विहार निवासी भीम सिंह राठी के रूप में हुई है। पीडि़त मनचन्दा की शिकायत पर इस केस में जांच के दौरान जालसाजों को फायदा पहुंचाने वाले ईओडब्ल्यू शाखा में तैनात एसआई प्रदीप द्वारा भी आरोपियों से रुपये लेने का खुलासा हुआ है। पुलिस ने एसआई प्रदीप समेत सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

योजनानुसार सबसे पहले सुभाष चन्द द्वारा जमीन का सजरा, मुटेशन व सेलडीड इत्यादि दस्तावेज हासिल की गई। टोनी ने कालकाजी तहसील में अपनी जान-पहचान का फायदा उठाकर रिकॉर्ड रूम में अस्थायी कर्मचारी संजय से मिला। अक्टूबर-2021 में संजय ने टोनी को वर्ष-1996 की असल बही दे दी। इसके बाद फर्जी जीपीए तैयार की गई और फर्जी जीपीए की कॉपी वर्ष 1996 की असल बही में लगा दी।