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Mumbai : महिलाओं के अश्लील विज्ञापनों पर सख्ती

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Mumbai: Crackdown on Obscene Advertisements Featuring Women

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) महिलाओं का अशोभनीय चित्रण करने वाले, अश्लीलता को बढ़ावा देने वाले तथा लैंगिक अपराधों के लिए उकसाने वाले विज्ञापनों, होर्डिंग्स, वेबसाइटों और सोशल मीडिया पर प्रसारित आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ कानून को और सख्त करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग के प्रभारी मंत्री आशिष शेलार (Ashish Shelar) ने शुक्रवार को विधानसभा में यह घोषणा की।

पुराने कानूनों में बढ़ेगा जुर्माना
आशिष शेलार ने कहा कि इस संबंध में बने पुराने कानूनों में जुर्माने की राशि वर्तमान समय के अनुसार बेहद कम है। इसलिए दंडात्मक प्रावधानों को और कड़ा बनाने तथा जुर्माने की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) के साथ समन्वय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए संतुलित नीति तैयार की जाएगी।

उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति होगी गठित
मंत्री ने बताया कि इस विषय पर व्यापक अध्ययन और आवश्यक सुझाव देने के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति (high-level expert committee) का गठन किया जाएगा। यह समिति महिलाओं की गरिमा की रक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाते हुए अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।

सुधीर मुनगंटीवार के विधेयक पर सरकार का जवाब
भाजपा के वरिष्ठ विधायक सुधीर मुनगंटीवार (BJP MLA Sudhir Mungantiwar) द्वारा प्रस्तुत अशासकीय विधेयक पर सरकार ने अपना पक्ष रखा। मुनगंटीवार ने लैंगिक अपराधों को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों, होर्डिंग्स और डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित आपत्तिजनक सामग्री पर कानूनी रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के अशोभनीय चित्रण और लैंगिक अपराधों को प्रोत्साहित करने वाली सामग्री के प्रति उसकी ‘जीरो टॉलरेंस’ (‘zero-tolerance’) नीति है। आशिष शेलार ने कहा कि सार्वजनिक माध्यमों पर अश्लील भाषा, चित्र, वीडियो या आपत्तिजनक हावभाव प्रसारित करने वालों के खिलाफ संविधान और मौजूदा कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार इस तरह की सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।

1986 और 1994 के कानूनों की होगी समीक्षा
मंत्री ने बताया कि भारतीय न्याय संहिता, महिलाओं के अशोभनीय प्रतिरूपण (प्रतिषेध) अधिनियम, केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत पहले से ही कारावास और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन 1986 और 1994 के कानूनों में निर्धारित जुर्माना आज की आर्थिक परिस्थितियों में बेहद कम है। इसलिए इन कानूनों की दंडात्मक धाराओं की समीक्षा कर जुर्माने में उल्लेखनीय वृद्धि के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया जाएगा।