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Gandhinagar / Ahmedabad : लोथल में निर्माणाधीन विश्व के सबसे बड़े मैरीटाइम म्यूज़ियम कॉम्प्लेक्स की प्रगति की केन्द्रीय मंत्री ने की समीक्षा

केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, डॉ. मनसुख मांडविया, दो केन्द्रीय राज्य मंत्री तथा मुख्यमंत्री पटेल सहभागी हुए

नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएमएचसी) भारत के विविधतापूर्ण समुद्री इतिहास को सीखने तथा समझने का केन्द्र बनेगा

अनुमानित 4500 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाला यह एनएमएचसी कॉम्प्लेक्स 400 एकड़ क्षेत्र में फैला होगा

एनएमएचसी कॉम्प्लेक्स में विश्व का सबसे ऊंचा लाइटहाउस म्यूज़ियम, एशिया का सबसे बड़ा अंडरवॉटर मरीन म्यूज़ियम एवं भारत का सबसे भव्य नेशनल म्यूज़ियम बनाया जाएगा

गांधीनगर/अहमदबाद : केन्द्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी तथा जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गुजरात में लोथल में निर्माणाधीन नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स प्रोजेक्ट की प्रगति की रविवार को गांधीनगर में समीक्षा की।

इस उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, बंदरगाह, जहाज़रानी व जलमार्ग तथा पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाईक तथा बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर उपस्थित रहे।

इस बैठक के दौरान रक्षा मंत्रालय (भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक) के साथ एक समुद्री दीर्घा ‘द जर्नी ऑफ़ इंडियन नेवी एंड कोस्ट गार्ड’ (भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक की यात्रा) के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

केन्द्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी तथा जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने बैठक में कहा कि बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय, गुजरात के लोथल में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (एनएमएचसी) विकसित हो रहा है। यह कॉम्प्लेक्स भारत की समृद्ध एवं विविधतापूर्ण समुद्री विरासत को प्रदर्शित करेगा। एनएमएचसी बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के अधीनस्थ सागरमाला प्रोग्राम के मुख्य प्रोजेक्टों में एक है और यह विश्व का सबसे बड़ा मैरीटाइम म्यूज़ियम कॉम्प्लेक्स होगा।”

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भी गुजरात सरकार के प्रयासों की प्रशंसा की तथा प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करने के लिए सभी लोगों को अधिक समन्वय बनाने के निर्देश दिए।

गुजरात सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए 375 एकड़ भूमि आवंटित की है। इसके अतिरिक्त, स्टाफ़ क़्वॉर्टर्स के विकास के लिए अतिरिक्त 25 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। राज्य राजमार्ग से एनएमएचसी प्रोजेक्ट साइट तक की सड़क का फ़ोर लेनिंग कार्य जारी है। लगभग 25 किलोमीटर दूर से नर्मदा जल की आपूर्ति करने का कार्य पूरा हो गया है। लगभग 17 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने का कार्य प्रगति पर है तथा 66 KV GIS सबस्टेशन की स्थापना के लिए फ़ंड आवंटित किया जा रहा है, जिसका कार्य भी प्रगति पर है और मूलभूत आंतरिक ढांचे के विकास के लिए राज्य सरकार ने 150 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय के सागरमाला प्रोग्राम के अंतर्गत 4500 करोड़ रुपए के अनुमानित ख़र्च के साथ लगभग 400 एकड़ क्षेत्र में एनएमएचसी विकसित किया जा रहा है और इसे जन-निजी संस्थानों के फ़ंड, विभिन्न संस्थानों तथा कॉर्पोरेट-सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड्स द्वारा विकसित करने का आयोजन किया जा रहा है। भारत के मुख्य बंदरगाह एनएमएचसी के लिए 209 करोड़ रुपये के फ़ंड का योगदान दे रहे हैं।

इस प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा बैठक के दौरान केन्द्रीय बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग तथा पर्यटन राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि एनएमएचसी को विश्व स्तरीय अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है, जो देश में इस प्रकार का प्रथम कॉम्प्लेक्स है और इसमें मैरीटाइम म्यूज़ियम, लाइटहाउस म्यूज़ियम, मैरीटाइम थीम पार्क्स, एम्यूज़मेंट पार्क्स आदि का समावेश है।

प्रोजेक्ट स्टेटस

सगरवाडा गांव से प्रोजेक्ट साइट तक के 1.58 किलोमीटर के फ़ोर लेन रोड का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है। 25 किलोमीटर की जलापूर्ति लाइन तथा 10 लाख लीटर क्षमता वाली पानी की टंकी का कार्य पूर्ण हुआ है। फेज़ 1A की भौतिक प्रगति 30 प्रतिशत से अधिक है। प्रथम 5 गैलरियों के लिए गैलरी टेंडर जारी किए गए हैं और नेवल गैलरी (समुद्री दीर्घा) तथा लोथन टाउन के लिए टेंडर तैयारी के अंतिम चरण में हैं। जोधपुर से विशेष रूप से गुलाबी पत्थर की खानें आइडेंटिफ़ाई की गई हैं और एनएमएचसी के फ़ेकेड के निर्माण के लिए इन पत्थरों का उपयोग किया जाएगा। म्यूज़ियमों में कलाकृतियों के लिए विभिन्न राज्यों के विभागों व संस्थानों के साथ जुड़ाव किया गया है।

एनएमएचसी को भारत के मैरीटाइम हेरिटेज यानी समुद्री विरासत को समर्पित इस प्रकार के सर्वप्रथम म्यूज़ियम के रूप में विकसित किया जा रहा है। यह केवल भारत की समृद्ध एवं विविधतापूर्ण समुद्री विरासत को ही प्रदर्शित नहीं करेगा, अपितु हमारे देश के मज़बूत समुद्री इतिहास एवं जीवंत समुद्र तटीय परम्परा को भी हाईलाइट करेगा, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के मैरीटाइम हेरिटेज की छवि को उन्नत करेगा।

उल्लेखनीय है कि बंदरगाह, जहाज़रानी एवं जलमार्ग मंत्रालय ने देश में बंदरगाह क्षेत्र के विकास की प्रतिबद्धता के अंतर्गत गुजरात में सागरमाला कार्यक्रम के तहत 57,000 करोड़ रुपये के 74 प्रोजेक्ट्स आइडेंटिफ़ाई किए हैं। इनमें 9,000 करोड़ रुपये के 15 प्रोजेक्ट्स पूर्ण हुए हैं, 25,000 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के 33 प्रोजेक्ट्स क्रियान्वयन में हैं और 22,700 करोड़ रुपये के 26 प्रोजेक्ट्स विकासाधीन हैं। केन्द्रीय लाइन मंत्रालय, मुख्य बंदरगाह, राज्य मैरीटाइम बोर्ड तथा अन्य राज्य एजेंसिया संयुक्त रूप से इन प्रोजेक्टों को क्रियान्वित कर रहे हैं।

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