पूर्वी चंपारण:(East Champaran) एक ओर जलवायु परिवर्तन के कारण बढते तापमान दूसरी ओर जिले में ध्वस्त व लचर सिंचाई व्यवस्था के कारण कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले पूर्वी चंपारण जिले के किसानों की अरमान और कमर एक साथ टूटता सा दिख रहा है।
ऐसे सरकार का यह कहना कि किसानों की आमदनी दुगुनी होगी और कृषि रोड मैप की घोषणा बेमानी साबित होती दिख रही है।गंडक सिंचाई परियोजना के तहत बनी अधिसंख्य नहरे और वितरणियां सूखी है।कई नहरे तो ऐसी है,जिसने आज तक पानी का मुंह तक नही देखा है,तो वही कई क्षेत्रों में लोगो ने नहरों को अतिक्रमित कर लिया है।
सबसे बदतर हालात जिले के सरकारी नलकूपों की है।मिली जानकारी के अनुसार ज्यादातर सरकारी नलकूप बंद है,वही कुछेक महज कागजों में चल रही है।
उल्लेखनीय है,कि लघु सिंचाई प्रमंडल मोतिहारी के तहत जिले में कुल 645 सरकारी नलकूप है। जिसमे 33 सरकारी नलकूप स्थायी रूप से बंद कर दिये गये हैं। वही शेष 612 सरकारी नलकूप बचे हैं,इसमें 285 को विभाग द्धारा चालू बताया जा रहा है।जबकि 327 नलकूपों को विभिन्न कारणों से बंद बताया जा रहा है।
हालांकि जब हिन्दुस्थान समाचार ने चालू नलकूपों की रियलिटी चेक किया तो ज्यादातर नलकूप बंद मिले।बताते चले कि सरकारी नलकूपों की मरम्मत से लेकर इसके संचालन का जिम्मा सरकार के द्वारा संबंधित पंचायत के मुखियों को दिया गया है। जिसके तहत जिले के 139 नलकूपों को चालू कराने लिए विभिन्न पंचायतों के मुखिया को राशि भी हस्तगत करा दी गयी है।बाबजूद इसके हालात जस की तस बनी हुई है।
लघु सिंचाई विभाग के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि जिले के 152 बंद पड़े नलकूपों को चालू कराने के लिए विभाग से 2.94 करोड़ रुपये की मांग की गयी है।वही इस बाबत सब्जी उत्पादक किसान नरेश कुशवाहा ने बताया कि जिले में सिंचाई व्यवस्था महज कागजों में चल रहा है।वही गन्ना उत्पादक किसान राम विनय सिंह ने बताया कि नहरों में पानी नही है,सरकारी नलकूप बंद है,वही सूर्य की बढती तपिश के साथ डीजल महंगी होने से पटवन करना मुश्किल हो रहा है,लिहाजा खेत में लगे गन्ना की फसल सूखने लगे है।


