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Chandigarh : बोरवेल में फंसे जींद के इंजीनियर की मौत, 45 घंटे बाद मिला शव

चंडीगढ़ : दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे पर जालंधर के निकट फ्लाईओवर के लिए बनाए जा रहे करीब 80 फीट गहरे बोरवेल में गिरे इंजीनियर का शव 45 घंटे बाद बाहर निकाला गया। एनडीआरएफ की टीमें काफी मशक्कत के बाद भी इंजीनियर को बचा नहीं सकी। सुरेश के शव को सिविल अस्पताल जालंधर में भेज दिया है।

हरियाणा के जींद निवासी 52 वर्षीय सुरेश को दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे पर जालंधर के निकट फ्लाईओवर के लिए तैयार किए जा रहे बोरवेल की मशीन ठीक करने के लिए शनिवार को इंजीनियर पवन के साथ बुलाया गया था। शनिवार की शाम सुरेश अपने साथी के साथ मशीन ठीक करने के लिए बोरवेल में उतरा था। वह अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर भी लेकर गया था, जब वह ऊपर आने लगा तो मिट्टी उस पर आकर गिरी। इसके बाद साइट पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। घटना के बाद से एनडीआरएफ की टीमों ने लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।

बचाव कार्य में सबसे बड़ी दिक्कत बगल में बने तालाब की वजह से आ रही थी। एनडीआरएफ की टीमें 50 फीट तक खुदाई कर चुकी थी, लेकिन उसके बाद की मिट्टी बेहद नरम होने से बार-बार खिसक रही थी। 40 घंटे के दौरान यहां से करीब 150 टिप्पर मिट्टी के निकाले गए। इसके बावजूद सुरेश की जान नहीं बच पाई। सुरेश जिस आक्सीजन सिलेंडर को लेकर बोर में उतरा था, उसकी लाइफ भी 18 घंटे ही थी।

जालंधर के अतिरिक्त उपायुक्त जसवीर सिंह ने बताया कि 45 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरेश के शव को बाहर निकाल लिया गया है। 50 फुट की खुदाई के बाद मिट्टी काफी नरम थी। वह बार-बार खिसक रही थी, जिसके चलते रेस्क्यू में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। रविवार रात यहां मिट्टी दोबारा खिसक गई थी। उसके बाद सोमवार सुबह भी दो बार मिट्टी खिसक चुकी है। शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों के हवाले किया जाएगा।

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