
नई दिल्ली : (New Delhi) भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मलहोत्रा (Reserve Bank of India Governor Sanjay Malhotra) ने इस साल खुदरा महंगाई में बढ़ोतरी की चेतावनी जारी की है। उन्होंने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समीक्षा (Consumer Price Index) बैठक के नतीजों की घोषणा करते हुए चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर का अनुमान 4.5% से बढ़कर 5.1% कर दिया। इसके अलावा उन्होंने रेपो रेट में कोई बदलाव न करते हुए इसे 5.25% पर बरकरार रखा है। वहीं, वास्तविक आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया।
अर्थव्यवस्था के अनुमान
उन्होंने कहा कि पेट्रोल की खुदरा कीमतों में मई से अब तक कुल 7.4 प्रतिशत और डीजल में 8.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बढ़ोतरी का कुल महंगाई पर करीब 0.36 प्रतिशत का सीधा असर पड़ेगा। इसके साथ दूसरे दौर के प्रभाव आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति में दिखाई देंगे। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी का असर वाणिज्यिक एलपीजी, औद्योगिक कच्चे माल, रसायन, रबड़ और प्लास्टिक (costs of commercial LPG and raw materials such as industrial inputs, chemicals, rubber, and plastic products) उत्पादों जैसे अन्य कच्चे माल पर भी दिख रहा है। साथ ही, कच्चे माल की लागत बढ़ने के दूसरे चरण के प्रभाव आगे चलकर महंगाई पर दबाव डाल सकते हैं।
डॉलर की मजबूती और रुपये की कमजोरी का असर
अमेरिकी डॉलर (US dollar) की मजबूती के सामने रुपये की कमजोरी के कारण जरूरी सामानों के आयात पर असर महंगाई को बढ़ाने में मदद करेगी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी और मानसून की अनिश्चितता की वजह से दाल, सब्जियों जैसी खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ने का जोखिम बना हुआ है। अल नीनो की वजह से कृषि पैदावार पर भी असर हो सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था
उन्होंने कहा कि राहत की बात यह है कि देश में अनाज का पर्याप्त भंडार है और जलाशयों में पानी का स्तर भी ठीक है। कुल मिलाकर, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र के दम पर भारत की अर्थव्यवस्था (India’s economy) आगे बढ़ रही है, और आरबीआई आने वाले समय में महंगाई व दुनिया के हालातों पर लगातार नजर बनाए रखेगा।


