
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra government) ने गिरणी कामगारों के लंबे समय से लंबित आवास मुद्दे को लेकर बड़ा कदम उठाया है। पहले गिरणी कामगारों को ठाणे, नवी मुंबई और रायगड जैसे मुंबई महानगर क्षेत्र (Mumbai Metropolitan Region) के इलाकों में घर देने का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन कामगारों ने इसका विरोध किया। इसके बाद अब सरकार ने मुंबई में ही घर उपलब्ध कराने के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित की है। साल 1982 की ऐतिहासिक गिरणी हड़ताल के बाद मुंबई की 58 कपड़ा मिलें बंद हो गई थीं। इसके बाद हजारों गिरणी कामगारों के पुनर्वास और आवास का मुद्दा वर्षों से लंबित बना हुआ है। सरकार अब तक करीब डेढ़ लाख गिरणी कामगारों में से केवल 15 हजार कामगारों को ही मिल परिसर में घर उपलब्ध करा सकी है। बाकी कामगार अब भी आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
मिल मालिकों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप
गिरणी कामगार संगठनों का आरोप है कि कई मिल मालिकों ने कामगारों के लिए निर्माण क्षेत्र का 25 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित नहीं रखा। साथ ही सरकार ने इस मामले में ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण हजारों कामगार अब तक घरों से वंचित हैं। इस मुद्दे को लेकर वर्षों से आंदोलन, मोर्चे और मांगें जारी हैं।
एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में हुई अहम बैठक
उपमुख्यमंत्री और गृहनिर्माण मंत्री एकनाथ शिंदे (leadership of Deputy Chief Minister and Housing Minister Eknath Shinde) के नेतृत्व में गिरणी कामगार संगठनों और प्रशासनिक अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी।
बैठक में कामगारों को मुंबई में ही घर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न विकल्पों पर अध्ययन करने के निर्देश दिए गए। सरकार ने नगरविकास विभाग के अपर मुख्य सचिव असिम गुप्ता (Asim Gupta) की अध्यक्षता में विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति में नगरविकास, वित्त, श्रम विभाग और म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है।


