
मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता अतुल लोंढे : (Atul Londhe, Chief Spokesperson for the Maharashtra Pradesh Congress Committee) ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर केंद्र सरकार (Central Government) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई केवल अंतरराष्ट्रीय युद्ध परिस्थितियों का परिणाम नहीं, बल्कि मोदी सरकार की पिछले 12 वर्षों की गलत आर्थिक और विदेश नीति का नतीजा है। तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद (press conference held at Tilak Bhavan) में लोंढे ने कहा कि ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर खाद्य तेल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुओं पर पड़ रहा है, जिससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
‘रुपया दुनिया की सबसे ज्यादा गिरने वाली मुद्रा’
अतुल लोंढे ने दावा किया कि 2014 में डॉलर के मुकाबले रुपया 58 रुपये था, जो अब 95 रुपये तक पहुंच गया है और जल्द 100 रुपये तक जा सकता है। उन्होंने कहा कि रुपया दुनिया की सबसे ज्यादा गिरावट वाली मुद्रा बन चुका है। उन्होंने सवाल उठाया कि यूपीए सरकार के दौरान रुपये में गिरावट पर प्रधानमंत्री की प्रतिष्ठा का मुद्दा उठाया जाता था, तो अब ऐसा क्यों नहीं कहा जा रहा।
पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर सरकार घिरी
लोंढे ने कहा कि यूपीए सरकार (UPA government) के समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर प्रति बैरल थी, तब पेट्रोल 72 रुपये और गैस सिलेंडर 412 रुपये में मिलता था। जबकि अब कच्चे तेल की कीमत लगभग 110 डॉलर होने के बावजूद पेट्रोल 100 रुपये के पार और गैस सिलेंडर 1000 रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पेट्रोल 35 रुपये प्रति लीटर करने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं हुआ। कांग्रेस नेता ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्मार्ट सिटी योजना’ (Smart Cities Mission) और मैन्युफैक्चरिंग जैसे बड़े प्रोजेक्ट अपेक्षित परिणाम देने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होने का दावा करती है, लेकिन पेट्रोल पंपों पर लग रही लंबी कतारें अलग तस्वीर पेश कर रही हैं।
रूस-ईरान तेल खरीद पर भी उठाए सवाल
अतुल लोंढे ने आरोप लगाया कि भारत को रूस और ईरान से रुपये में सस्ता तेल मिल रहा था, लेकिन अमेरिका के दबाव के कारण भारत वह तेल खरीद नहीं पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि सस्ते तेल का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा बल्कि कुछ निजी कंपनियों को फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर लाखों करोड़ रुपये की कमाई की, लेकिन उसका लाभ आम नागरिकों को नहीं मिला।
‘नीट पेपर लीक सरकारी विफलता’
नीट पेपर लीक (NEET paper leak controversy) मामले पर बोलते हुए लोंढे ने कहा कि 23 लाख छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है और चार छात्रों की मौत “सरकारी विफलता” का परिणाम है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि केवल औपचारिक जांच से न्याय नहीं मिलेगा। अतुल लोंढे ने कहा कि 2014 में भी नीट पेपर लीक का मामला सामने आया था और तब भी सीबीआई जांच हुई थी। उन्होंने सवाल किया कि उस जांच का क्या परिणाम निकला और वर्तमान मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।


