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Mumbai : धारावी पुनर्विकास के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

Mumbai: Fierce Protests Against Dharavi Redevelopment

हजारों लोगों ने निकाला मोर्चा
मुंबई : (Mumbai)
धारावी क्षेत्र (Dharavi area) में पुनर्विकास परियोजना के खिलाफ सोमवार को भारी जन आक्रोश देखने को मिला। ‘धारावी बचाव आंदोलन’ (‘Dharavi Bachao Andolan’) के बैनर तले हजारों स्थानीय निवासियों ने सड़कों पर उतरकर विशाल मोर्चा निकाला और परियोजना के मौजूदा स्वरूप का जोरदार विरोध किया। यह मोर्चा कुम्हारवाड़ा नाका से शुरू होकर 90 फीट रोड होते हुए साहिल होटल के पास समाप्त हुआ। प्रदर्शनकारियों ने “अड़ानी हटाओ” और “सरकारी एजेंसियों से पुनर्विकास कराओ” (“Remove Adani” and “Let Government Agencies Handle Redevelopment,”)जैसे नारे लगाए और अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाया।

एसआरए अधिकारियों को सौंपा ज्ञापन
मोर्चे के बाद प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने एसआरए के कार्यकारी अधिकारी डॉ. महेंद्र कल्याणकार (Executive Officer of the SRA (Slum Rehabilitation Authority), Dr. Mahendra Kalyankar) से मुलाकात कर अपनी मांगों का विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इसमें पुनर्विकास प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय की मांग की गई।

सर्वे प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सर्वे के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। कई लोगों को अपात्र घोषित कर बेघर करने की कोशिश की जा रही है, जबकि पुराने सर्वे को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष सर्वे कराने की मांग की जा रही है।

राजनीतिक नेताओं की मौजूदगी
इस आंदोलन में अंबादास दानवे, अनिल देसाई, वर्षा गायकवाड, ज्योति गायकवाड और महेश सावंत (Ambadas Danve, Anil Desai, Varsha Gaikwad, Jyoti Gaikwad, and Mahesh Sawant) सहित कई पूर्व जनप्रतिनिधि और विभिन्न दलों के पदाधिकारी शामिल हुए।

प्रमुख मांगें क्या हैं?
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने 15 प्रमुख मांगें रखीं। इनमें सभी करीब 1.20 लाख झोपड़ियों को पात्र घोषित करना, हर परिवार को धारावी में ही कम से कम 500 वर्गफुट का घर देना, छोटे व्यवसायों के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाना, और किसी भी निवासी को शहर के बाहर पुनर्वासित न करने की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों ने पुनर्विकास परियोजना से निजी कंपनी को हटाकर सरकारी एजेंसियों जैसे म्हाडा, एमएमआरडीए या सिडको को जिम्मेदारी देने की मांग की। उनका कहना है कि मौजूदा मॉडल में स्थानीय लोगों का विश्वास नहीं लिया गया है। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनका आरोप है कि वर्तमान पुनर्विकास योजना में भारी अनियमितताएं (current redevelopment scheme is rife with gross irregularities and infringes) हैं और इससे मूल निवासियों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

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