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Mumbai : महाराष्ट्र के रेस्तरां में अब ‘असली पनीर’ का खुलासा अनिवार्य

Mumbai: Disclosure of 'Real Paneer' Now Mandatory in Maharashtra Restaurants

मुंबई : (Mumbai) महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने (Food and Drug Administration) उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य भर के सभी रेस्तरां, होटलों और भोजनालयों के लिए यह बताना अनिवार्य होगा कि उनके व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाने वाला पनीर (paneer)असली डेयरी उत्पाद है या कोई वनस्पति आधारित विकल्प। 20 मार्च को जारी यह निर्देश आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है, जिसका उद्देश्य खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करना और ग्राहकों को धोखे से बचाना है।

मेनू कार्ड और बिल पर देनी होगी पूरी जानकारी
नए नियमों के अनुसार, खाद्य व्यवसायियों को अपने मेनू कार्ड, डिस्प्ले बोर्ड और यहां तक कि ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल पर भी स्पष्ट रूप से पनीर की गुणवत्ता का उल्लेख करना होगा। यदि कोई रेस्तरां असली दूध से बने पनीर के बजाय सस्ते गैर-डेयरी विकल्पों (जैसे खाद्य तेल, स्टार्च और इमल्सीफायर से बना पनीर) का उपयोग करता है, तो उसे ‘पनीर विकल्प’ के रूप में लेबल करना होगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को भी उत्पादों पर सटीक लेबलिंग करनी होगी।

शुद्धता और पारदर्शिता के लिए उठाया गया कदम
FDA के अधिकारियों (FDA officials) का कहना है कि हालांकि पनीर के विकल्प स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित नहीं होते, लेकिन वे असली पनीर की तुलना में काफी सस्ते होते हैं। कई प्रतिष्ठान ग्राहकों को बिना बताए इन सस्ते विकल्पों का उपयोग कर रहे थे, जो उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। असली पनीर पूरी तरह से दूध से निर्मित होता है, जबकि इसके विकल्प में वनस्पति तेलों का मिश्रण होता है। इस निर्देश के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि ग्राहकों को पता हो कि वे किस वस्तु के लिए भुगतान कर रहे हैं।

एसोसिएशन ने किया समर्थन; उल्लंघन पर होगी कड़ी कार्रवाई
होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन (Hotel and Restaurant Association) (पश्चिमी भारत) ने इस कदम का स्वागत किया है। एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने एफडीए आयुक्त श्रीधर दुबे पाटिल से मुलाकात कर निर्देश के कार्यान्वयन पर चर्चा की और अपने सदस्यों को अनुपालन सुनिश्चित करने की सलाह दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो भी भोजनालय इस नियम का उल्लंघन करते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इससे मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में बाहर खाना खाने वाले लोगों को अब अधिक पारदर्शिता मिलेगी।

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