
लखनऊ : (Lucknow) उत्तर प्रदेश विधानसभा (Uttar Pradesh Legislative Assembly) के एक दिवसीय सत्र की शुरुआत से पहले ही राजधानी लखनऊ में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच खुला सियासी टकराव देखने को मिला। सदन की कार्यवाही पूर्वाह्न 11 बजे शुरू होने से पहले ही विधानसभा परिसर नारेबाजी, तख्तियों और धरना-प्रदर्शन का केंद्र बन गया।
सत्ता पक्ष की ओर से भाजपा की महिला विधायकों के नेतृत्व में मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि विधानसभा पहुंचे। उनके हाथों में “नारी शक्ति का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान” और “देख रहा है सारा देश इंडी गठबंधन का पेंच” जैसे नारे लिखी तख्तियां थीं। सभी नेता महिला आरक्षण के समर्थन में आवाज बुलंद करते हुए सपा और कांग्रेस पर निशाना साध रहे थे।
यह पूरा घटनाक्रम उस विशेष सत्र से पहले हुआ, जिसे नारी सशक्तिकरण और महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाया गया है। सत्ता पक्ष के नेताओं ने दावा किया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश में योगी सरकार के नेतृत्व में महिलाओं को सम्मान, अवसर और प्राथमिकता मिल रही है।
सपा और कांग्रेस महिला विरोधीः दयाशंकर
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह (Transport Minister Dayashankar Singh) ने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस का इतिहास महिला विरोधी रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों में परिवार से बाहर की महिलाओं को नेतृत्व में अवसर नहीं मिलता। सपा में डिंपल यादव (Dimple Yadav) और कांग्रेस में सोनिया गांधी व प्रियंका गांधी (Sonia Gandhi and Priyanka Gandhi) तक ही सीमित जिम्मेदारियां दी जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष का रुख नकारात्मक रहा और भाजपा महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
माताप्रसाद पांडेय की अगुवाई में धरना
दूसरी ओर, विपक्ष ने भी जोरदार जवाबी प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी के विधायकों ने विधानसभा परिसर में चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के सामने धरना दिया। सपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री संग्राम सिंह यादव ने भाजपा पर “झूठ की राजनीति” करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद में महिला आरक्षण बिल पारित हो चुका है और समाजवादी पार्टी उसका समर्थन कर चुकी है।
जातिगत जनगणना का भी मुद्दा उठा
सवाल उठाते हुए उन्होंने पूछा कि केंद्र सरकार अब तक इस कानून को लागू क्यों नहीं कर रही। इसके साथ ही उन्होंने जाति जनगणना का मुद्दा भी उठाया और कहा कि “जिसकी जितनी भागीदारी, उतनी उसकी हिस्सेदारी” का वादा भी भाजपा सरकार पूरा नहीं कर रही है।
सत्र शुरू होने से पहले ही जिस तरह से दोनों पक्षों के बीच टकराव सामने आया, उसने स्पष्ट कर दिया है कि विधानसभा के भीतर महिला आरक्षण और नारी सशक्तिकरण का मुद्दा आज पूरे दिन राजनीतिक बहस के केंद्र में रहेगा।


